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डाउनलोड करेंकोटा. दो माह की मासूम बच्ची को डॉक्टर एमबीएस व जेकेलोन अस्पताल के चक्कर कटवाते रहे और मासूम की जान चली गई। वाकया शनिवार दोपहर का है। बच्ची को इलाज के लिए अंता से कोटा लाया गया था। परिजनों ने बताया कि दो माह की आयशा अंता में नानी के यहां थी। उसकी तबीयत खराब हुई तो वहां डॉक्टरों ने निमोनिया बताते हुए बच्ची को कोटा ले जाने को कहा। बच्ची को परिजन वैन से कोटा ला रहे थे, लेकिन रास्ते में गढ़ेपान के पास ट्रक की टक्कर से वैन पलट गई। परिजन दूसरे वाहन से कोटा आए और बच्ची को एमबीएस अस्पताल में दिखाया।
वहां सीटी स्कैन के बाद बच्ची को जेकेलोन ले जाने को कहा तो परिजन मोटरसाइकिल पर गोद में बैठाकर उसे ले गए। वहां डॉक्टर ने कह दिया कि बच्ची के सिर में चोट है और ब्लीडिंग हो रही है, इसे तत्काल एमबीएस ले जाकर न्यूरो सर्जन को दिखाओ। फिर से परिजन उसे एमबीएस लाए, जहां बच्ची की स्थिति देख डॉक्टरों के हाथ-पांव फूल गए। इसी बीच बच्ची की सांसें थम गई। परिजनों ने पूरे घटनाक्रम को लेकर गहरा रोष जताया। परिवार के सदस्य शमशुद्दीन ने आरोप लगाया कि एमबीएस से जेकेलोन भेजने के दौरान बच्ची को ऑक्सीजन तक नहीं लगाई गई, जबकि उसकी स्थिति बिगड़ रही थी।
3 बड़े सवाल
1 परिजनों के मुताबिक, जब सीटी स्कैन हो गया था और एमबीएस में डॉक्टरों ने देख लिया था तो उसे जेकेलोन क्यों भेजा गया?
2 क्या सिर की चोट से ज्यादा जरूरी इलाज निमोनिया का होता है? ऐसा था तो जेकेलोन से विशेषज्ञ को क्यों नहीं बुलाया गया?
3 यदि जेकेलोन भेजने की ज्यादा ही जरूरत थी तो बच्ची को एंबुलेंस से क्यों नहीं भेजा गया?
अधीक्षक भी मान रहे-बच्ची को हैड इंजरी थी
एमबीएस के अधीक्षक डॉ. पीके तिवारी से सीधी बात
Q. आपके अस्पताल के डॉक्टर घुमाते रहे और बच्ची की जान चली गई?
A. मुझे इस केस के बारे में पता नहीं था। मैंने पता किया तो बताया गया कि उसे हैड इंजरी थी और वह सीरियस थी।
Q. जब हैड इंजरी थी तो जेकेलोन क्याें भेजा गया, क्या हैड इंजरी का इलाज वहां होता है?
A. हैड इंजरी का इलाज हमारे यहीं होता है। ऐसे केस को न्यूरो सर्जन देखते हैं। मैं मामले का पता करता हूं्।
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