डॉक्टर मरीज से अच्छा व्यवहार करें: सिविल सर्जन

Mohali Bhaskar News - सरकारी सेहत संस्थाओं में आने वाले मरीजों के साथ डॉक्टर और अन्य स्टाफ बहुत ही प्यार और मीठे तरीके से बात करें। इसके...

Nov 10, 2019, 07:32 AM IST
सरकारी सेहत संस्थाओं में आने वाले मरीजों के साथ डॉक्टर और अन्य स्टाफ बहुत ही प्यार और मीठे तरीके से बात करें। इसके अलावा डॉक्टर और स्टाफ मरीजों से अच्छा व्यवहार करें। यह बात सिविल सर्जन मोहाली डॉ. मनजीत सिंह की ओर से सेहत संस्थाओं के डॉक्टर्स और स्टाफ के साथ मीटिंग करते हुए कही गई। सिविल सर्जन ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को असल मायनों में मनाने के लिए हम सभी को उनकी बताई गई शिक्षाअाें पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाबा नानक का संदेश है कि धर्म-नसल, जात-पात, रंग-रूप आदी सभी सिखयाओ को तनदेही व पुरी लगन के साथ सेवा की जाए। सिविल सर्जन ने कहा कि सरकारी अस्पतालों व डिस्पेंसरियों में आने वाले मरीजों से अगर वहां पर तैनात डॉक्टर तथा स्टाफ उनसे प्यार से बात करें और अच्छे तरीके से उनकी बिमारी के बारे में पूछें तो मरीज की आधी दिक्कत तो वैसे ही ठीक हो जाती है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर्स और स्टाफ को मरीजों के दुख-तकलीख को खुद महसूस करना चाहिए। ताकि मरीजों को एक अपनेपन का अहसास सरकारी सेहत संस्थाओं में मुहैया करवाया जा सके।

सिटी रिपोर्टर | मोहाली

सरकारी सेहत संस्थाओं में आने वाले मरीजों के साथ डॉक्टर और अन्य स्टाफ बहुत ही प्यार और मीठे तरीके से बात करें। इसके अलावा डॉक्टर और स्टाफ मरीजों से अच्छा व्यवहार करें। यह बात सिविल सर्जन मोहाली डॉ. मनजीत सिंह की ओर से सेहत संस्थाओं के डॉक्टर्स और स्टाफ के साथ मीटिंग करते हुए कही गई। सिविल सर्जन ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को असल मायनों में मनाने के लिए हम सभी को उनकी बताई गई शिक्षाअाें पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाबा नानक का संदेश है कि धर्म-नसल, जात-पात, रंग-रूप आदी सभी सिखयाओ को तनदेही व पुरी लगन के साथ सेवा की जाए। सिविल सर्जन ने कहा कि सरकारी अस्पतालों व डिस्पेंसरियों में आने वाले मरीजों से अगर वहां पर तैनात डॉक्टर तथा स्टाफ उनसे प्यार से बात करें और अच्छे तरीके से उनकी बिमारी के बारे में पूछें तो मरीज की आधी दिक्कत तो वैसे ही ठीक हो जाती है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर्स और स्टाफ को मरीजों के दुख-तकलीख को खुद महसूस करना चाहिए। ताकि मरीजों को एक अपनेपन का अहसास सरकारी सेहत संस्थाओं में मुहैया करवाया जा सके।

बेरुखी से बात की जाती है...

काफी समय से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की ओर से वहां पर तैनात डॉक्टर्स और स्टाफ की ओर से उनके साथ मिसबिहेव करने की शिकायतें की जा रही थी। मरीजों का कहना था कि मरीज पहले ही परेशान होते हैं, ऊपर से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर्स तथा स्टाफ की ओर से उनके साथ बहुत ही बेरुखी से बात की जाती है। साथ ही काफी मिसबिहेव किया जाता है।

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