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डाउनलोड करेंपानीपत. अावारा कुत्तों ने बुधवार को 9 लोगों को काट लिया। इसमें 5 बच्चे शामिल हैं। गली में खेल रहे एक वर्ष के अरहान के गाल को कुत्ते ने काट खाया। जबकि एक महिला की नाक को नोच लिया। उसे पीजीआई रेफर किया गया है। सिविल अस्पताल में रोजाना 8 से 10 केस आवारा कुत्तों के काटने के पहुंच रहे हैं। पांच दिनों में सिविल अस्पताल में करीब 45 केस आ चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा 15 साल से कम उम्र के बच्चे शामिल हैं। रोजाना लोगों के जख्मी होने के बाद भी निगम आवारा कुत्तों से शहर को राहत नहीं दिला पा रहा है।
जानिए, हिंसक क्यों हो रहे कुत्ते
- पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वाईडी त्यागी नेकहा कि देशी नस्ल के कुत्ते शहर में हैं। काटनेपर इंजेक्शन नहीं लगाया तो जानलेवा रैबीज हो जाती है। निश्चित समय में कुत्तों का टीकाकरण जरूरी है।
- शहर में अवैध रूप से मीट की जहां-तहां दुकान चल रहीं हैं। मांस खाने वाले कुत्तों में ताकत और काटने की आदत बढ़ जाती है।
- गलियों के कुत्ते पेट भरने के लिए कुछ भी खाते हैं। इससे पेट में कीड़े पैदा होतेहैं। कुत्ता कमजोर होने के साथ चिड़चिड़ा हो जाता है।
- कुत्तों में स्केबीज नामक चर्मरोग भी होता है। मंदिरों के आसपास मिठाई खाने वाले कुत्तों में यह ज्यादा रहता है। यह छूत का रोग है।
कुत्ते ने एक दिन में 9 लोगों को काटा जिनमें 5 बच्चे
आर्य नगर निवासी मुस्तकीन का एक वर्षीय बेटा अरहान घर के बाहर खेल रहा था। तभी आवारा कुत्ता उसका गाल खा गया। पास में बैठी दादी ने कुत्ते को भगाकर अरहान को सिविल अस्पताल पहुंचाया। वहीं शिव नगर में खेतों में काम कर रही 45 वर्षीय हरदेवी ने बताया कि एक पागल कुत्ता खेत में पिल्लों को काट रहा था, वह भगाने के लिए गई तो कुत्ता उनके पीछे पड़ गया। हरदेवी गिरीं तो कुत्ता गाल और नाक खा गया। डंडा लेकर बचाने आए पति रणबीर के दोनों हाथों की अंगुली में कुत्ते ने काट लिया। हरदेवी को कुत्ते ने इतना जख्मी कर दिया कि सिविल अस्पताल में उपचार नहीं हो पायाा। उसे रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ा। शिव नगर में कुत्ता काटने के तीन और केस आए। 6 वर्षीय हिमांशु पुत्र सुरेश, 60 वर्षीय इंद्रपाल, 4 वर्षीय वंश पुत्र मोहित, इंद्रा बिहार कॉलोनी निवासी 9 वर्षीय वंशिका पुत्री धर्मबीर समेत 9 लोग सिविल अस्पताल इलाज कराने पहुंचे।
कुत्ते पकड़ने को टेंडर निकालने में 5 लाख टर्न ओवर, शर्त ऐसी की पीछे हटीं एजेंसियां
कुत्तों की नसबंदी के लिए निकाले जाने वाले टेंडर में नगर निगम शर्तें ही ऐसी लगा देता है कि कोई भी टेंडर नहीं ले पाता। पिछली बार निकाले टेंडर में5 लाख का टर्नओवर और 3 साल केकार्य अनुभव की शर्तेंं लगा दी थी। टेंडर लेने वाली एजेंसी को कुत्तों को पकड़ने, उनका इलाज करने और इलाज के दौरान चार दिन तक बेहतर खानपान के साथ निगरानी में रखने, डॉक्टर की टीम एजेंसी की होने जैसी कई अन्य शर्ते भी थी। पिछले साल एक एजेंसी ही शर्त पूरी कर पाई, जिससे टेंडर प्रक्रिया निरस्त करनी पड़ी थी।
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