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चंबल से पानी लाने के लिए 331 करोड़ रुपए होंगे खर्च, डीपीआर तैयार, एनसीआर भेजी जाएगी फाइल

3 वर्ष पहले
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ग्वालियर.   शहर की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए चंबल नदी से पानी लाने के लिए 331 करोड़ रुपए की राशि खर्च होगी। चंबल नदी से तिघरा जलाशय तक पानी पंप करने पर बिजली खर्च सालाना 15 करोड़ रुपए होगा। इसके अलावा 65 किमी लंबी पाइप लाइन की देखरेख पर 4.50 करोड़ रुपए सालाना खर्च होंगे। यह जानकारी इंदौर की फर्म मेहता एंड मेहता एसोसिएट्स की तकनीकी टीम ने शुक्रवार को बाल भवन में प्रजेंटेशन के दौरान दी। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री माया सिंह की मौजूदगी में हुए प्रजेंटेशन के दौरान तय हुआ कि बिजली का खर्च बचाने के लिए चंबल नदी के पास सोलर प्लांट लगवाया जाएगा। 


चंबल से 150 एमएलडी पानी लाने के लिए सर्वे फर्म के संचालक हितेंद्र मेहता, एक्सपर्ट महेश पाठक व अरविंद जोशी ने नगर निगम को दो तरह की योजनाएं बताई हैं। इनमें से कम लागत, बिजली व मेंटेनेंस के खर्च को देखते हुए मंत्री, मेयर-इन-काउंसिल के सदस्य व निगम अधिकारियों ने पहली योजना पर सहमति दी है। इसमें चंबल नदी से तिघरा तक सीधी लाइन बिछाकर पानी लाया जाएगा। 

लागत कम करने ग्वालियर-मुरैना के लिए चंबल नदी पर बनेगा एक ही इंटेकवेल

इस योजना पर बनी सहमति
- लंबाई: चंबल नदी से तिघरा तक 65 किमी लंबी 1500 मिली मीटर व्यास की लाइन बिछाई जाएगी। 
- पंप: इंटेकवेल पर 1500 हॉर्स पॉवर के 4 पंप लगेंगे।  3 पंपों से पंपिंग होगी और एक अतिरिक्त होगा। 
- लागत: 331 करोड़ {बिजली खर्च: 15 करोड़ सालाना  
- रखरखाव: 4.5 करोड़ सालाना {विशेषता: बैक प्रेशर टैंक बनाने का खर्च बचने से लागत कम होगी। ऊंचाई कम होने के कारण बिजली के सालाना खर्च पर भी 1.50 करोड़ रुपए कम खर्च होगा। 

 

 

लागत अधिक होने से यह खारिज
- लंबाई: चंबल नदी से 47.20 किमी लंबी पाइप लाइन रायरू के पास मांगू पुरा तक बिछाई जाएगी। 
- पंप: मांग पुरा पहाड़ी पर बैक प्रेशर टैंक बनाया जाएगा, जहां चंबल से 3 पंप के जरिए पानी एकत्र करेंगे। एक पंप अतिरिक्त रहेगा। यहां से 18 किमी दूर तिघरा तक लाइन बिछाई जाएगी। 
- लागत: 399 करोड़

- बिजली: 16.50 करोड़ सालाना

- रखरखाव: 4.50 करोड़ रुपए सालाना

- परेशानी: बैक प्रेशर टैंक के कारण लागत बढ़ेगी।

 

इनसे लेना होगी अनुमति  

वाइल्ड लाइफ बोर्ड के अलावा जल संसाधन विभाग से मंजूरी लेनी होगी। पटरी के आसपास से पाइप लाइन निकालने पर रेलवे एवं राजस्व विभाग, एमपीईबी और एनएचएआई से भी अनुमति लेनी होगी।

 

निगमायुक्त विनोद शर्मा ने बताया कि चंबल नदी से पानी लाने के लिए तकनीकी टीम ने शुक्रवार को प्रजेंटेशन दिखाया है। अब अगले सप्ताह में फाइनल प्रजेेंटेशन मुख्य अभियंता नगरीय प्रशासन विभाग के सामने भोपाल में होगा। उसके बाद योजना को अंतिम रूप देकर डीपीआर एनसीआर को लोन के लिए भेज दी जाएगी। 

 

सोलर प्लांट से कम होगा बिजली का खर्च: चंबल नदी के पास इंटेकवेल पर लगे पंपों को चलाने के लिए सोलर प्लांट लगाने पर सहमति बनी है। इसके लिए घड़ियाल केंद्र से लगभग एक किमी की दूरी पर 400 बीघा जमीन लेकर प्लांट लगाया जाएगा। सोलर प्लांट लगने बिजली पर होने वाला सालाना खर्च कम होगा। 

 

यह भी दिया विकल्प : प्रजेंटेशन के दौरान 2 योजनाएं बताने के साथ ही यह विकल्प भी बताया कि यदि बैक प्रेशर टैंक बनाने वाली दूसरी योजना पर सहमति बनती है तो योजना की लागत 30 करोड़ रु. कम करने के लिए सीमेंट के पाइप का इस्तेमाल किया जा सकता है। चंबल नदी से मांगू पुरा पर प्रस्तावित बैक प्रेशर टैंक तक लोहे की पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इस टैंक से तिघरा तक 18 किमी में सीमेंट के पाइप बिछाकर लागत कम हो सकती है। 

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