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क्रिकेट के भगवान कहे जाते हैं सचिन, लेकिन फिर भी एक सपना रह गया अधूरा, अब बेटा कर रहा उसे पूरा

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई बॉलर डेनिस लिली ने सचिन की बॉलिंग देखकर बतौर बॉलर उन्हें रिजेक्ट कर दिया था।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 09, 2018, 02:32 PM IST

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    स्पोर्ट्स डेस्क. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के बेटे अर्जुन तेंडुलकर का सिलेक्शन हाल ही में श्रीलंका जाने वाली भारत की अंडर-19 टीम के लिए हुआ है। अर्जुन इस टूर पर बॉलिंग ऑलराउंडर की हैसियत से जा रहे हैं। वे लेफ्ट आर्म मिडियम पेसर होने के साथ ही साथ लेफ्ट हैंड बैट्समैन भी हैं, उनके कोच के मुताबिक वे लगातार 135 किलोमीटर की स्पीड से बॉल कर सकते हैं। वैसे खास बात ये है कि अर्जुन अपने पिता सचिन का अधूरा सपना ही पूरा कर रहे हैं। बता दें कि अपने करियर के शुरुआती दिनों में सचिन भी बॉलर बनना चाहते थे। इसके लिए वे 14 साल की उम्र में चेन्नई स्थित MRF पेस फाउंडेशन भी गए थे। यूं टूटा था सचिन का सपना...
    - सचिन जब बतौर क्रिकेटर अपना करियर शुरु करना चाहते थे तो वे बैट्समैन नहीं बल्कि बॉलर बनना चाहते थे। इसी सिलसिले में वे साल 1987 में चेन्नई स्थित MRF पेस फाउंडेशन टेस्ट देने पहुंचे थे। जहां क्रिकेटर्स को नेशनल लेवल की ट्रेनिंग दी जाती है।
    - उस वक्त पेस फाउंडेशन के डायरेक्टर पूर्व ऑस्ट्रेलियाई बॉलर डेनिस लिली थे, जिन्होंने सचिन की बॉलिंग देखकर बतौर बॉलर उन्हें रिजेक्ट कर दिया था। इस बात का खुलासा खुद लिली ने साल 2012 में वहां से विदाई लेते हुए किया था।
    - तेंडुलकर वहां गए तो फास्ट बॉलर बनने का सपना लेकर थे, लेकिन लिली ने उन्हें बॉलिंग के बजाए बैटिंग पर ध्यान लगाने की सलाह दी थी। जिसका असर सालभर बाद नजर आया।
    सालभर बाद मिला था नया सचिन
    - पहली बार पेस एकेडमी से रिजेक्ट होने के सालभर बाद सचिन दोबारा वहां टेस्ट देने पहुंचे, लेकिन इस बार वे बिल्कुल बदले हुए थे। लिली ने उन्हें बॉलर बनने की बजाए बैट्समैन बनने की सलाह दी थी। सचिन ने भी उनकी सलाह को दिल से माना और खुद को बैटिंग के लिए तैयार कर लिया था।
    - सालभर बाद जब सचिन पहुंचे तो क्या हुआ इस बारे में भी लिली ने खुद बताया था। लिली के मुताबिक, 'जब सचिन एक साल बाद दोबारा आए तो उनकी उम्र 15 साल के आसपास थी। मैं नेट पर उसके पीछे खड़ा हुआ था, सचिन ने पहली बॉल पर बॉलर के सिर के ऊपर से चौका लगा दिया। मुझे लगा कि ये बस एक तुक्का है, लेकिन इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई बाउंड्री लगा दी। बॉलर्स उसे समझ नहीं पा रहे थे और वो पार्क के चारों ओर हिट कर रहा था।'
    - लिली ने कहा, 'वो करीब 12 बॉल में 48 रन बनाकर बैटिंग कर रहा था तो मैंने तब हेड कोच रहे टीए शेखर से पूछा था कि ये लड़का कौन है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था, 'आपको याद होना चाहिए, ये वही लड़का है जिसकी बॉलिंग देखकर आपने उसे रिजेक्ट कर दिया था। इसका नाम सचिन है।'
    आज भी हो जाते हैं शर्मिंदा
    - सचिन से हुई पहली मुलाकात को याद करते हुए लिली का कहना है कि, 'सच कहूं तो मैं काफी शर्मिंदा हुआ था कि मैंने बतौर फास्ट बॉलर उसे रिजेक्ट कर दिया था।'
    - हालांकि इसके बाद लिली ने कहा, 'मुझे लगता है कि मैंने उसके लिए और खेल के लिए अच्छा काम किया था। वैसे मैं मजाक कर रहा हूं, लेकिन मैं उस घटना को कभी भूलूंगा नहीं।'
    - सचिन का फास्ट बॉलर बनने का सपना तो अधूरा रह गया था, लेकिन अब उनके इसी अधूरे सपने को उनके बेटे अर्जुन पूरा कर रहे हैं। अर्जुन ने कूच बिहार ट्रॉफी (नेशनल अंडर-19) के इस सीजन में 5 मैचों में 18 विकेट लिए थे।

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Web Title: Sachin Tendulkar Also Revealed It Was The Former Australia Bowler That Told Him To Ditch Bowling And Focus On Batting.
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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