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रांची. रांची में वाटर सप्लाई को लेकर हाहाकार मचा है। कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां एक-एक दिन छोड़कर वाटर सप्लाई हो रही है। नगर निगम की बोरिंग धड़ाधड़ फेल हो रही है। जबकि पेयजल विभाग पानी की जगह आंकड़ों की आपूर्ति करने में बिजी है। रूक्का डिविजन कहता है कि किसी समस्या को छोड़ कर बाकी दिनों में 30 एमजीडी पानी बूटी जलागार को भेजा जा रहा है। जबकि बूटी डिविजन का कहना है कि अगर इतना पानी मिल जाए, तो शहर में पानी की समस्या खत्म हो जाएगी।
- बूटी डिविजन के अनुसार, 25 से 26 एमजीडी पानी ही उसे प्राप्त हो रहा है। अब सवाल यह उठता है कि झूठ कौन बोल रहा है। अगर दोनों सही बोल रहे हैं तो फिर रूक्का से बूटी आते तक महज 15 किमी में पांच एमजीडी (2 करोड़, 27 लाख लीटर) पानी कहां जा रहा है।
डाटा में काफी अंतर
रूक्का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से बूटी जलागार को पानी भेजा जाता है, जिससे 80 फीसदी इलाके में वाटर सप्लाई की जाती है। रूक्का प्लांट से बूटी जलागार की दूरी 15 किमी है। इतने दूरी में एक से दो एमजीडी का लॉस हो सकता है। क्योंकि 33 इंच राइजिंग पाइप लाइन में पानी छोड़े जाने व बंद होने के बाद इतना पानी पाइप में रह जाता है। मगर डाटा के आकलन के बाद कुछ तिथि में यह अंतर 3 से 5 एमजीडी तक है। इतना अंतर का साफ कारण है कि दोनों स्थानों पर फ्लो मीटर नहीं है।
#क्या कहते हैं दोनों डिविजन के इंजीनियर
प्लांट में कोई खराबी न हो तो प्रतिदिन 30 एमजीडी पानी रूक्का से बूटी को भेजा जाता है। अब इसे कैसे वितरण किया जा रहा है, यह तो बूटी डिविजन के इंजीनियर ही बता सकते हैं।
-प्रभात कुमार सिंह, ईई रूक्का
गलत बात है। अगर 30 एमजीडी पानी मिल जाए तो आसानी से पूरे क्षेत्र में आपूर्ति की जा सकेगी। किसी भी दिन 30 एमजीडी पानी नहीं मिला है। हमारे पास प्रतिदिन का डाटा है।
-सुनील कुमार, ईई, बूटी जलागार
#क्या कहते हैं एक्सपर्ट
इतना पानी मिलने पर शहर में जलापूर्ति में कमी आ जाए। यह सब मिस मैनेजमेंट की पराकाष्ठा है। अगर फ्लो मीटर नहीं भी है, तो मोटर पंपिंग करके पानी दी जाती है। इससे सही आकलन किया जा सकता है। मैन्युअल व मनमाने ढंग से डाटा तैयार हो रहा है।
-रमेश कुमार, सेवानिवृत्त इंजीनियर इन चीफ, पेयजल विभाग
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