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शादी से नौकरी तक 5 तरह से नुकसान करता है पितृ दोष, ये सिर्फ कुंडली से नहीं, वास्तु दोष से भी होता है, 3 आसान उपायों से पा सकते हैं इससे मुक्ति

ज्योतिष में पितृ दोष को अशुभ योग माना गया है, इसकी वजह से किसी भी काम में आसानी से सफलता नहीं मिलती है।

Danik Bhaskar | Jun 22, 2018, 07:43 PM IST

रिलिजन डेस्क। ज्योतिष में कुछ दोष ऐसे हैं, जिनकी वजह से व्यक्ति को बुरे समय का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही एक दोष है पितृ दोष। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य पर राहु की दृष्टि पड़ रही है या सूर्य और राहु एक साथ हैं तो पितृ दोष बनता है। कोलकाता की एस्ट्रोलॉजर डॉ. दीक्षा राठी के अनुसार कुंडली में राहु पांचवें भाव में हो तो पितृ दोष का असर होता है। इसकी वजह से पति-पत्नी के बीच वाद-विवाद होता रहता है, घर में अशांति रहती है। जानिए पितृ दोष के कुछ खास संकेत, जो दैनिक जीवन में मिलते हैं...

1. जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उन्हें जमीन-जायदाद, घर खरीदने-बेचने में नुकसान उठाना पड़ सकता है। शादी होने में और नौकरी में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

2. अगर पुरुष की कुंडली में पितृ दोष है तो संतान का सुख मिलने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पति-पत्नी स्वस्थ होते हैं, तब भी संतान प्राप्ति में मुश्किलें आती हैं।

3. अगर घर के उत्तर-पूर्व में या पश्चिम-दक्षिण में शौचालय है तो पितृ दोष बढ़ता है।

4. पितृ दोष के कारण धन होने पर भी घर में सुख-शांति नहीं रहती है। पति-पत्नी के बीच विवाद होते रहते हैं।

5. वास्तु के अनुसार दक्षिण और पश्चिम का कोना यानी नैऋत्य कोण पितृ का स्थान माना गया है। अगर कुंडली में पितृ दोष है तो इस दिशा में नकारात्मकता रहती है।

# पितृ दोष के लिए ज्योतिष की मान्यता

ज्योतिष की मान्यता है कि अगर परिवार में किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हो जाती है और मृत व्यक्ति का सही विधि से श्राद्ध नहीं हो पाता है तो उस परिवार में जन्म लेने वाली संतान की कुंडली में पितृ दोष रहता है। खासतौर पर पुत्र संतान की कुंडली में पितृ दोष रहता है।

# कर सकते हैं ये उपाय

> पितृ दोष के लिए हर माह अमावस्या पर तर्पण और श्राद्ध करना चाहिए। पितरों के लिए धूप-दीप करना चाहिए। ऊँ पितृदेवताभ्यो नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।

> हर साल श्राद्ध पक्ष में पितरों के लिए दान-पुण्य और तर्पण आदि शुभ काम करना चाहिए।

> सूर्य देव को रोज सुबह जल चढ़ाना चाहिए।

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