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उपाय- अगर माता-पिता से मदद नहीं मिलती है तो ये है सूर्य और चंद्र का अशुभ संकेत

सूर्य-चंद्र के अशुभ योग की वजह से पुरुष होता है स्त्री से अपमानित

Dainik Bhaskar

May 30, 2018, 05:19 PM IST
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रिलिजन डेस्क। ज्योतिष में सूर्य को आत्मा कारक ग्रह माना गया है और चंद्र को मन का स्वामी माना गया है। अगर कुंडली के किसी भी भाव में सूर्य और चंद्रमा एक साथ हों तो ऐसे लोगों की कुंडली में अमावस्या का अशुभ योग बन जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार कुंडली में सूर्य और चंद्र की स्थिति से मालूम हो सकता है कि हमें कितना यश, मान-सम्मान मिलेगा। कुंडली में अगर सूर्य और चंद्र दोनों साथ होते हैं तो ऐसे लोगों को जीवन में बार-बार कई जगह अपमानित भी होना पड़ता हैं।

जानिए इस योग के प्रभाव...

> यदि किसी व्यक्ति की कुंडली के पहले भाव में सूर्य और चंद्र स्थित हो तो उसे माता और पिता से दुख मिलता है। वह पुत्र से दुखी और निर्धन होता है।

> चंद्रमा और सूर्य चौथे भाव में हो तो व्यक्ति को पुत्र और सुख से वंचित रहता है। ऐसा व्यक्ति मूर्ख और गरीब हो सकता है।

> कुंडली के सातवें भाव में सूर्य और चंद्रमा स्थित हो तो व्यक्ति जीवनभर पुत्र और स्त्रियों से अपमानित होता रहता है। ऐसे व्यक्ति के पास धन की भी कमी रहती है।

> सूर्य और चंद्रमा किसी व्यक्ति की कुंडली के दसवें भाव में स्थित हो तो वह सुंदर शरीर वाला, नेतृत्व क्षमता का धनी, कुटिल स्वभाव का और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाला होता है।

सूर्य-चंद्र के लिए कर सकते हैं ये उपाय

> प्रति दिन सूर्य को ब्रह्म मुहूर्त में जल चढ़ाएं।

> अधिक से अधिक हल्के और सफेद रंगों के कपड़ें पहनें। गहरे रंग के कपड़ों से बचें।

> सफेद रंग का रुमाल हमेशा अपने साथ रखें।

> प्रतिदिन केशर या चंदन का तिलक लगाएं।

> सूर्य एवं चंद्रमा से संबंधित वस्तुओं का दान करें।

> चंद्रमा से शुभ फल प्राप्त करने के लिए शिवजी और श्रीगणेश की आराधना करें।

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