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सुशासन व न्याय के साथ राज्य के विकास का प्रयास : नीतीश

3 वर्ष पहले
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सुशासन व न्याय के साथ राज्य के विकास का प्रयास : नीतीश

पटना के अधिवेशन भवन में विकास प्रबंधन संस्थान के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, \"\"मेरे लिए विकास की परिकल्पना न्याय के साथ विकास है, जिसमें समाज के सभी हिस्से, समुदाय और इलाकों का विकास बराबर हो और सभी विकास की मुख्य धारा में जुड़ सकें।\"\"
उन्होंने दीक्षांत समारोह में \'पोस्ट ग्रेजुएशन प्रोग्राम इन डिप्लोमा मैंनेजमेंट\' के तीसरे बैच के 24 प्रशिक्षित छात्रों को डिप्लोमा सर्टिफिकेट दिया और उन्हें बधाई दी।
उन्होंने कहा कि आज विकास की अवधारणा से पर्यावरण गायब है।
उन्होंने कहा, \"\"देश की आजादी के बाद विकास के प्रति ऐसी मानसिकता बनी, जिसने पर्यावरण की चिंता ही छोड़ दी। इसका नतीजा देखने को भी मिल रहा है। पहले गंगा नदी का पानी पीने लायक होता था, मगर अब नहाने लायक भी नहीं है।\"\"
उन्होंने पर्यावरण को बचाने पर जोर देते हुए कहा कि विकास ऐसा हो कि पर्यावरण को भी नुकसान न हो और बुनियादी सुविधाओं को प्राप्त भी किया जा सके।
पूरे समाज के एक समान विकास की वकालत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक तौर पर पिछड़े लोगों को बराबरी पर लाने की जरूरत है, इसके लिए उन लोगों को विशेष अवसर मिलने चाहिए।
इससे पहले कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विकास प्रबंधन संस्थान के चेयरमैन और बिहार के पूर्व मुख्य सचिव अनूप मुखर्जी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि 101 वर्ष पहले आज ही के दिन चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी ने मोतिहारी में मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होकर उच्चतर विधान और अपनी अंतरात्मा की आवाज का पालन करने की बात कही थी।
उन्होंने कहा कि विकास प्रबंधन संस्थान के लिए आदर्श और मूल्य सर्वोपरि हैं।
--आईएएनएस
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