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मिस्रः अल जज़ीरा के पत्रकारों को जमानत मिली

6 वर्ष पहले
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मुहम्मद फाहमी और बहेर मुहम्मद

कथित तौर पर मिस्र में प्रतिबंधित संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड की मदद करने के मामले में दोबारा सुनवाई का सामना कर रहे अल जज़ीरा के दो पत्रकारों को जमानत दे दी गई है.

पिछले जून में मोहम्मद फ़ाहमी और बहेर मोहम्मद को उनके ऑस्ट्रेलियाई सहकर्मी पीटर ग्रेस्टे के साथ गिरफ़्तार किया गया था.

पिछले हफ्ते विदेशी नागरिकों को पकड़े जाने पर उनके देश वापस भेजने वाले क़ानून के तहत पीटर ग्रेस्टे को रिहा कर दिया गया था.

फ़ाहमी ने आज़ाद होने के लिए अपनी मिस्र की नागरिकता छोड़ दी थी, ताकि उन्हें कनाडा भेज दिया जाए, लेकिन बहेर मोहम्मद के पास कोई पासपोर्ट ही नहीं है.

जमानत

इन पत्रकारों की गिरफ्तारी का दुनिया भर में विरोध हुआ

दोनों पत्रकार इस बात से साफ इंकार करते हैं कि 2013 में तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद मोरसी के तख़्ता पलट के बाद प्रतिबंधित मुस्लिम ब्रदरहुड की वो मदद कर रहे थे.

उनका कहना है कि उन्हें महज इसलिए जेल में डाल दिया गया क्योंकि वे खबरों की रिपोर्ट कर रहे थे.

बुधवार को काहिरा की अदालत ने इस मामले में 23 फ़रवरी को सुनवाई की तारीख़ देते हुए दोनों को रिहा करने के आदेश दिए.

फ़ाहमी को 33 हज़ार डॉलर (क़रीब 20 लाख रुपए) की जमानत पर रिहा किया गया जबकि बहेर मोहम्मद को बिना कोई जमानत दिए रिहा किया गया.

इन पत्रकारों पर पहली बार चलाए गए मुकदमे की दुनिया भर में आलोचना हुई थी.

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