--Advertisement--

हिमाचल / नूरपुर में न्याय के लिए 24 बच्चों के माता-पिता नाक रगड़ते हुए डीसी ऑफिस पहुंचे

अप्रैल में हुए स्कूल बस हादसे में गई थी इन बच्चों की जान

भास्कर न्यूज भास्कर न्यूज
Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 04:37 PM IST

शिमला. इस साल अप्रैल में नूरपुर में हुए बस हादसे में मारे गए 24 मासूम बच्चों के परिवार को न्याय पाने के लिए सड़कों पर नाक तक रगड़नी पड़ रही है। हादसे के कारणों और दोषियों का अभी तक पता न चलने से आहत परिजन सोमवार को धर्मशाला में नाक रगड़ते हुए डीसी ऑफिस तक पहुंचे। इनमें बुजुर्ग दादा-दादी, लाडलों को खो चुकी माएं और पिता शामिल थे। यहां भी जब आश्वासन मिलने लगे तो दुखी मांओं ने डीसी से इंसाफ की बात रखी। परिजनों ने मामले की जांच सीबीआई से करवाने का मांग की। 
 

मृतक बच्चों के नाम से लिखा मार्मिक पत्र भी सौंपा : नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया ने कहा कि सरकार जो कर सकती थी उससे अधिक किया और उससे अधिक करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा जो ट्रक गिरा था उस पर भी एफआईआर दर्ज हो गई है व सरकार ने कोर्ट में भी स्टेटमेंट दे दी है। प्रदेश सरकार व् प्रसाशन ने जो किया है उससे भी अधिक करने का प्रयास कर रही है। 
 

जांच पर जो सवाल हैं, उस पर ध्यान देंगे: डीसी कांगड़ा संदीप कुमार ने कहा कि हादसे की न्यायिक जांच पर जो प्रश्न चिन्ह लगे हैं उस पर ध्यान दिया जाएगा। मृतक बच्चों के परिजनों ने जो पत्र दिया है उसे सरकार तक पहुंचाया जाएगा। परिजनों का कहना है कि हादसे के कारणों में जो भी दोषी हो, उन्हें सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह उनके दुख में सम्मिलित हैं तो वहां उपस्थित एक मां के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने रोते हुए कहा कि अपने जिगर के टुकड़ों को खोकर सब कुछ झेलते हम हैं और तड़पते हम हैं। अधिकारी गाड़ी में बैठते ही हर गम को भूल जाते हैं। डीसी ने स्मारक बनाने की बात कही तब भी लोगों ने दो टूक जवाब दे दिया-आप बस न्याय दिला दीजिए। 

 

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखा गए पत्र में मृतक बच्चों ने न्याय की गुहार लगाई है। पत्र में लिखा गया है कि हम सिर्फ देख रहे हैं और हमारे परिजन झेल रहे हैं। कोई सुनवाई नहीं हो रही। पत्र में लिखा है कि जिस उम्र में हमने जिंदगी के सबक सीखने थे, उसी उम्र में मौत हमें अपना पाठ पढ़ाकर साथ ले गई।

 

सर, हम में से कुछ बच्चे तो ऐसे थे जो 9 अप्रैल को पहली बार स्कूल गए थे। पत्र में कहा गया है कि सर आपको आज तक जीवित लोगों के ही पत्र मिले होंगे शायद यह दुर्भाग्य से पहला मौका होगा जब आपको मृत बच्चों की ओर से पत्र मिलेगा। डीसी कांगड़ा संदीप कुमार ने कहा कि हादसे की न्यायिक जांच पर जो प्रश्न चिन्ह लगे हैं उस पर ध्यान दिया जाएगा।

 

मृतक बच्चों के परिजनों ने जो पत्र दिया है उसे सरकार तक पहुंचाया जाएगा। परिजनों का कहना है कि हादसे के कारणों में जो भी दोषी हो, उन्हें सजा मिलनी चाहिए। संदीप ने कहा कि वह उनके दुख में सम्मिलित हैं तो वहां उपस्थित एक मां के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने रोते हुए कहा कि अपने जिगर के टुकड़ों को खोकर सब कुछ झेलते हम हैं और तड़पते हम हैं। अधिकारी गाड़ी में बैठते ही हर गम को भूल जाते हैं। डीसी ने स्मारक बनाने की बात कही तब भी लोगों ने दो टूक जवाब दे दिया-आप बस न्याय दिला दीजिए। 

--Advertisement--