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- Khuti News Even After Two Months Farmers Have Not Received Paddy Money Are Reeling
दो माह बाद भी किसानों को नहीं मिले हंै धान के रुपए, काट रहे हैं चक्कर
सरकार को धान बेचना किसानों को रास नहीं आ रहा है। करीब दो माह से किसानों को धान के बदले भुगतान रुका पड़ा है। धान के बदले एक सप्ताह के भीतर भुगतान उनके खाते में आने की बात विभाग द्वारा कही गई, लेकिन राशि नहीं आने से किसानों की परेशानी बढ़ रही है। कुछ दिन पूर्व अपने खूंटी दौरे पर ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने भी जल्द से जल्द किसानों को भुगतान दिए जाने की बात कही थी। साथ ही उन्होंने कहा था कि धान के समर्थन मूल्य में सरकार और पांच सौ रुपये का बोनस देगी। परंतु कई दिन बीत जाने के बावजूद किसानों को धान का भुगतान नहीं किया गया है। जिले के किसानों ने धान अधिप्राप्ति केंद्रों में आठ हजार क्विंटल से अधिक धान दिये हैं। पर अबतक उन्हें भुगतान नहीं किया गया है। किसान लैंपस कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं। धान अधिप्राप्ति केन्द्रों से रोज एक ही जवाब मिलने से किसान अपने को ठगे महसूस कर रहे हैं। जिले में 8 जनवरी से धान अधिप्राप्ति केन्द्र में धान की खरीदारी शुरू कर दी गयी थी।
धान अधिप्राप्ति केंद्र में अबतक 207 किसानों ने 8235.95 क्विंटल धान दिया है। खूंटी लैंपस में 41 किसानों ने 1028.76 क्विंटल, मुरहू लैंपस में 897.14 क्विंटल, अड़की लैंपस में 828.92 क्विंटल,कर्रा लैंपस मे 1595.35 क्विंटल,रनिया लैंपस मेें 2139.59 तथा तोरपा लैंपस में 1746 क्विंटल धान की खरीददारी हुई है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी रोहित सिन्हा ने कहा कि धान अधिप्राप्ति केंद्रों में धान देने वाले किसानों को मायूस होने की आवश्यकता नहीं है। सभी किसानों को भुगतान जल्द से जल्द हो इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लैंपस में धान देने वाले किसानों की सूची भेजी गई है। भुगतान के एवज में कुछ अन्य कागजात की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि किसानों को जल्द भुगतान हो इसके लिए जिला प्रशासन भी गंभीर है। साथ ही प्रयासरत है। प्रतिदिन विभागीय अधिकारियों से बातचीत की जा रही है। गौरतलब है कि किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए इस वर्ष सरकार ने धान का समर्थन मूल्य साधारण धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 18.15 रूपए प्रति किलोग्राम निर्घारित किया गया है। वहीं ग्रेड ‘ए‘ धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 18.35 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया था। इसके अतिरिक्त प्रति क्विंटल 185 रूपए की दर से बोनस का भुगतान करने का फैसला लिया था।