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आप ख़ुश, भाजपा निराश, कांग्रेस में सन्नाटा

6 वर्ष पहले
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सलमान रावी

बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली

अब बस कुछ ही घंटों की बात है और यह स्पष्ट होता चला जाएगा कि दिल्ली की गद्दी पर कौन बैठेगा? मतगणना से एक दिन पहले उत्सुकता बढ़ना तो स्वाभाविक है.

मतदान के फ़ौरन बाद किए गए \'एग्ज़िट पोल\' के रुझान में आम आदमी पार्टी को बढ़त मिलने की बात कही जा रही है. ज़ाहिर है, इन सर्वेक्षणों की वजह से आम आदमी पार्टी के खेमे में काफी उत्साह है और परिणाम आने से पहले ही मानो जश्न की तैयारियां की जा रही हैं.

जनता के पटाखे, उनकी मिठाइयां

ईस्ट-पटेल नगर में पार्टी के दफ्तर के बाहर माइक और स्पीकर ट्रक से उतारे जा रहे हैं. यहाँ जमा कार्यकर्ताओं का हुजूम काफी जोश में हैं.

वो कहते हैं कि मंगलवार, यानी चुनाव के परिणाम वाले दिन के लिए उनकी तरफ से पूरी तैयारियां कर ली गयीं हैं. पटाखे आ चुके हैं और मिठाइयां भी.

\"आम आदमी की पार्टी है और सबका इंतज़ाम आम आदमी ने खुद ही किया है. आम आदमी ने चुनाव के लिए पैसे भी दिए और अब वो खुद ही मिठाई भी लेकर आएगा.\"

न नेता, न कार्यकर्ता

दिल्ली के पंडित पंत मार्ग पर भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली प्रदेश कार्यालय में माहौल थोड़ा शांत है.

एक्का दुक्का कार्यकर्ता और नेता ही नज़र आ रहे हैं. \'एग्ज़िट पोल\' के सर्वेक्षणों से थोड़ी मायूसी ज़रूर छाई हुई है.

चुनाव के परिणामों के आने से एक दिन पहले प्रदेश कार्यालय में इस तरह की खामोशी थोड़ी अस्वाभाविक ज़रूर है क्योंकि बस दो दिन पहले तक यहां गहमा गहमी रही है.

आखिर ऐसा क्या हो गया है, मैंने पूछा पुराने कार्यकर्ता जीपी सिंह से. उन्होंने कहा कि भाजपा के खेमे में \'एग्ज़िट पोल\' के रुझानों से थोड़ी मायूसी है.

\'कांटे की टक्कर\'

दूसरी ओर, पार्टी के नेताओं का मानना है कि इस बार चुनाव में टक्कर कांटे की रही है. लक्ष्मी नगर से आए पार्टी के कार्यकर्ता जीबीपी यादव कहते हैं कि उन्हें इतनी ज़ोरदार टक्कर की उम्मीद नहीं थी.

उन्होंने कहा, \"यह सही है. हमने उम्मीद नहीं की थी कि टक्कर इतनी कांटे की होगी.\"

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश समिति के प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय का दावा है कि सर्वे अपनी जगह है, सरकार तो भाजपा की ही बन रही है. \"बस आप देखते जाइए. \'एग्ज़िट पोल\' का हम सम्मान करते हैं मगर वो शत प्रतिशत सही हैं, ऐसा भी नहीं है. परिणाम आने दीजिए. हमारा प्रदर्शन बेहतर ही होगा और हम सरकार भी बनाएंगे.\"

ये है क़यामत की रात

दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है. न नेता, न ही कार्यकर्ता, वहाँ कोई है ही नहीं.

दफ्तर के पीछे कार्यालय सचिव प्रमोद मुझे धूप सेंकते हुए मिल गए. मुझे देखते ही वो कहने लगे कि राजनीति में उतार चढ़ाव तो लगा रहता है. \"वक़्त-वक़्त की बात है भाई साहब. आज कांग्रेस के बुरे दिन हैं. मगर इतने बुरे भी नहीं जितना \'एग्जिट पोल\' बता रहे हैं.\"

इतना तो समझ में आ रहा है कि इस बार दिल्ली विधान सभा का चुनाव पिछले चुनावों के मुकाबले ज़्यादा रोचक रहा और प्रत्याशियों में टक्कर भी कांटे की ही होगी.

\'एग्ज़िट पोल के सर्वे अपनी जगह पर, मगर अब तो परिणाम ही बताएँगे कि दिल्ली की सियासत का ऊँट किस करवट बैठेगा. वैसे सभी दलों के लिए आज की रात, क़यामत की रात ही है.

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