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घर सामान तौलने आते थे सभी

एक वर्ष पहले
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कैलाश खेर

 मैंने दिल्ली में 1984 का कर्फ्यू देखा है। वह आज के जनता कर्फ्यू से अलग था। तब एक बात देखी कि परिवारों, मोहल्लों आैर समुदाय के लोगों में कर्फ्यू के दौरान आपसी प्रेम भावना बढ़ी थी। शाम को सभी मिलकर एक-दूसरे का हाल पूछते थे। लोग एक-दूसरे की मदद के लिए खड़े हो गए। कर्फ्यू के वक्त हमारे यहां लोग सरसों का तेल लेने आए थे, क्योंकि हमारे खेतों का ही सरसों हमारे यहां कनस्तरों में रखा हुआ था। मां ने अगर सौ-सौ ग्राम ही तेल बांटा होगा तो पूरे मोहल्ले का काम हो गया। दुकानें बंद थी। मेरे घर पर बड़ी-सी तराजू थी। लोग अपना सामान तौलने के लिए मेरे ही घर पर आते थे।

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