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अमरनाथ गुफा की 10 बातें, 30 मई तक हो सकेगा अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन

अमरनाथ शिवजी से संबंधित पवित्र तीर्थ है। इस तीर्थ की यात्रा बहुत ही कठिन है।

Danik Bhaskar | May 06, 2018, 05:15 PM IST

रिलिजन डेस्क। अगले महीने में 28 जून से अमरनाथ यात्रा शुरू हो रही है। अमरनाथ हिन्दुओं के सबसे खास तीर्थों में से एक है। इस यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कराने की अंतिम तारीख 30 मई है। अमरनाथ श्राइन बोर्ड के एडिशनल सीईओ भूपेंद्र कुमार के अनुसार इस साल से अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालु अब ग्रुप (समूह) रजिस्ट्रेशन भी करा सकते हैं। इसके लिए भी अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने अंतिम तारीख 30 मई घोषित की है। समूह रजिस्ट्रेशन में पांच या इससे अधिक संख्या होना जरूरी है। यह संख्या 200 तक भी हो सकती है। जानिए अमरनाथ गुफा से जुड़ी 10 सर्वाधिक प्रचलित बातें...

1. देशभर में शिवजी के कई तीर्थ स्थान हैं और उनमें से सर्वाधिक महत्वपूर्ण तीर्थ है अमरनाथ गुफा। शिवजी के इस तीर्थ का इतिहास हजारों साल पुराना है। यहां स्थित शिवलिंग पर लगातार बर्फ की बूंदें टपकती रहती हैं, जिससे 10-12 फीट ऊंचा शिवलिंग निर्मित होता है। इस साल करीब 12 फीट ऊँचा शिवलिंग निर्मित हो गया है।

2. अमरनाथ शिवलिंग की ऊंचाई चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ घटती-बढ़ती रहती है। पूर्णिमा के दिन शिवलिंग अपने पूरे आकार में होता है, जबकि अमावस्या के दिन शिवलिंग का आकार कुछ छोटा हो जाता है।

3. अमरनाथ गुफा श्रीनगर से करीब 145 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गुफा 150 फीट ऊंची और करीब 90 फीट लंबी है। इस तीर्थ का सर्वाधिक महत्व इसलिए है, क्योंकि इसी स्थान भगवान शिव ने पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था।

4. अमरनाथ गुफा हिमालय पर्वत पर करीब 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां चारों ओर बर्फीली पहाड़ियां दिखाई देती हैं। इस गुफा में शिवलिंग स्थित है जो कि बर्फ से निर्मित होता है। यह शिवलिंग पूरी तरह प्राकृतिक रूप से निश्चित समय के लिए ही बनता है।

5. इस गुफा का इतिहास हजारों साल पुराना है। अमरनाथ गुफा की खोज सबसे पहले किसने की, इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन यहां ऐसी मान्यता प्रचलित है कि बहुत समय पहले इस क्षेत्र में एक चरवाहे को कोई संत दिखाई दिए गए थे। संत ने चरवाहे को कोयले से भरी हुई एक पोटली दी थी। जब चरवाहा अपने घर पहुंचा तब पोटली के अंदर का कोयला सोना बन गया था। यह चमत्कार देखकर चरवाहा आश्चर्यचकित हो गया और संत को खोजने के लिए पुन: उसी स्थान पर पहुंच गया। संत को खोजते-खोजते उस चरवाहे को अमरनाथ की गुफा दिखाई दी। जब वहां के लोगों ने इस चमत्कार के विषय में सुना तो अमरनाथ गुफा को दैवीय स्थान माना जाने लगा और यहां पूजन शुरू हो गया।

6. अमरनाथ गुफा का पूरा क्षेत्र बहुत सुंदर और मनमोहक नजर आता है। यहां बड़ी-बड़ी पहाडिय़ां बर्फ से ढंकी रहती हैं, हिमालय की वनस्पतियों के नजारे और झीलें आंखों को सुखद अहसास देते हैं।

7. बाबा अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए दो रास्ते हैं। एक पहलगाम होकर जाता है और दूसरा सोनमर्ग बलटाल से जाता है। यानी देशभर के किसी भी क्षेत्र से पहले पहलगाम या बलटाल पहुंचना होता है। इसके बाद की यात्रा पैदल की जाती है।

8. पहलगाम से अमरनाथ जाने का रास्ता सरल और सुविधाजनक समझा जाता है। बलटाल से अमरनाथ गुफा की दूरी 14 किलोमीटर है, लेकिन यह मार्ग पार करना मुश्किलभरा होता है। इसी वजह से अधिकतर यात्री पहलगाम के रास्ते अमरनाथ जाते हैं।

9. शास्त्रों के अनुसार इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। माता पार्वती के साथ ही इस रहस्य को शुक (कबूतर) ने भी सुन लिया था। यह शुक बाद में शुकदेव ऋषि के रूप में अमर हो गए। गुफा में आज भी कई श्रद्धालुओं को कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई देता है, जिन्हें अमर पक्षी माना जाता है। भगवान शिव जब पार्वती को अमर कथा सुनाने ले जा रहे थे, तो उन्होंने छोटे-छोटे अनंत नागों को अनंतनाग में छोड़ा, माथे के चंदन को चंदनबाड़ी में उतारा, अन्य पिस्सुओं को पिस्सू टॉप पर और गले के शेषनाग को शेषनाग नामक स्थल पर छोड़ा था। ये सभी स्थान अभी भी अमरनाथ यात्रा के दौरान रास्ते में दिखाई देते हैं।

10. अमरनाथ गुफा में शिवलिंग के साथ ही श्रीगणेश, पार्वती और भैरव के हिमखंड भी निर्मित होते हैं। हर वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा से रक्षाबंधन और सावन के पूरे माह यहां श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मई से अगस्त के बीच अमरनाथ गुफा में शिवलिंग के दर्शन किए जा सकते हैं।

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