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कर्ण को इंद्र ने दिया था अचूक दिव्यास्त्र, किसी के पास भी नहीं था इसका जवाब, लेकिन श्रीकृष्ण ने बचा लिया अर्जुन को

कौरव सेना में कुछ ही ऐसे योद्धा थे, जो अर्जुन का सामना कर सकते थे, उनमें से कर्ण एक था।

Danik Bhaskar | Jun 22, 2018, 08:15 PM IST

रिलिजन डेस्क। महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण किरदारों में से एक था कर्ण। कुंती पुत्र और दुर्योधन के मित्र कर्ण के पास एक शक्ति ऐसी थी, जिसका जवाब किसी भी योद्धा के पास नहीं था। कर्ण इस दिव्यास्त्र से अर्जुन को भी हरा सकता था। श्रीकृष्ण की वजह से इस शक्ति का उपयोग कर्ण को पहले ही करना पड़ गया था। इस संबंध में महाभारत का एक प्रसंग है। जानिए कर्ण को देवराज इंद्र से कैसे मिला दिव्यास्त्र और किस वजह से अर्जुन के सामने कर्ण इस शक्ति का उपयोग नहीं कर सका...

# जब इंद्र ने कर्ण से मांगे कुंडल और कवच

> महाभारत के अनुसार जब इंद्र ने कर्ण से उसके कुंडल और कवच मांगे तो बदले में एक दिव्य शक्ति कर्ण को दी थी। इंद्र ने कर्ण से कहा था कि इस शक्ति का उपयोग जिस पर भी करोगे, वह अवश्य मर जाएगा, लेकिन इस शक्ति का उपयोग सिर्फ एक बार ही हो सकता है। इसीलिए कर्ण ने ये दिव्य शक्ति अर्जुन के लिए संभाल कर रख थी।

> श्रीकृष्ण ये बात जानते थे। इसीलिए उन्होंने युद्ध में भीम के पुत्र घटोत्कच को भेजा। उसने कौरव सेना में खलबली मचा दी। कोई भी योद्धा घटोत्कच को काबू नहीं कर पा रहा था। तब दुर्योधन ने कर्ण से कहा कि इंद्र द्वारा दी गई शक्ति का उपयोग करो और इस राक्षस को मार डालो, नहीं तो ये पूरी कौरव सेना को खत्म कर देगा।

> इसके बाद कर्ण ने उस शक्ति का उपयोग करके घटोत्कच को मार डाला। इस प्रकार अर्जुन के लिए बचाकर रखी गई दिव्य शक्ति का उपयोग कर्ण ने घटोत्कच के लिए कर लिया।

# घटोत्कच की मृत्यु पर श्रीकृष्ण दिख रहे थे प्रसन्न

> जब भीम का पुत्र घटोत्कच मारा गया तो सभी पांडव दुखी थे, लेकिन उस समय श्रीकृष्ण प्रसन्न दिखाई दे रहे थे। यह देखकर अर्जुन को आश्चर्य हुआ। अर्जुन ने श्रीकृष्ण से पूछा कि भीम का पुत्र मारा गया है, सभी दुखी हैं और आप प्रसन्न क्यों हैं?

> इस प्रश्न के जवाब में श्रीकृष्ण ने कहा कि अभी यही दिखाई दे रहा है कि कर्ण ने घटोत्कच को मार दिया है, लेकिन सच ये है कि घटोत्कच ने कर्ण को मार दिया है।

> इंद्र ने कर्ण से कुंडल और कवच पहले ही ले लिए थे। इसके बाद उसके पास सिर्फ एक ही अजेय शक्ति थी, जिसका उपयोग घटोत्कच के लिए कर लिया। इंद्र की दी हुई शक्ति कर्ण के पास रहती तो उसे जीत पाना किसी के लिए भी संभव नहीं था। ऐसे में पूरी पांडव सेना उसका मुकाबला नहीं कर पाती। अब कर्ण के पास कोई दिव्य शक्ति नहीं बची है और अब युद्ध में उसे पराजित करना संभव है।

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