जसदेव सिंह नहीं रहे, 9 ओलिंपिक, 6 एशियाड में की थी लाइव कमेंट्री

3 वर्ष पहले
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  • उन्हें ओलिंपिक के सर्वोच्च पुरस्कार ओलिंपिक ऑर्डर से भी सम्मानित किया गया था
  • आकाशवाणी में समाचार वाचक के रूप में शुरू किया था करियर, आठ हॉकी विश्व कप की कमेंट्री की
  • 1963 से 48 साल तक गणतंत्र दिवस परेड का आंखों देखा हाल श्रोताओं तक पहुंचाया

नई दिल्ली. जाने-माने खेल कमेंटेटर जसदेव सिंह का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को यहां निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं। जसदेव ने 1968 से 2000 के दौरान आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए नौ ओलिंपिक, आठ हॉकी विश्व कप और छह एशियाई खेलों की कमेंट्री की। उन्होंने कई स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोहों पर भी कमेंट्री की।

1) मै जसदेव सिंह बोल रहा हूं... अब खामोश

कुछ साल पहले उन्होंने अपने जीवन की कहानी 'मै जसदेव सिंह बोल रहा हूं…' के रूप में एक किताब की शक्ल दी थी। उन्हें 1985 में पद्मश्री और 2008 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

केंद्रीय खेल राज्य मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने उनके निधन पर दुख जताया। उन्होंने ट्वीट किया,‘गहरे दु:ख के साथ हमारे बेहतरीन कमेंट्रेटरों में से एक श्री जसदेव सिंह के निधन की जानकारी मिली। वह आकाशवाणी और दूरदर्शन के बेहतरीन कमेंटेटर थे।’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, ‘भारतीय कमेंट्री की 'स्वर्णिम आवाजों' में से एक जसदेव सिंह के निधन के बारे में जानकर दु:ख हुआ। उनके परिवार और असंख्य प्रशंसकों के साथ मेरी संवेदना है।’

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट किया कि उनके निधन से रेडियो कमेंट्री के एक युग का अंत हो गया। एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने लिखा, ‘टेलीविजन से पहले के युग में वे ऐसे हॉकी कमेंटेटर थे जो गेंद के साथ रफ्तार मिला सकते थे।’

जसदेव की आवाज देश के कई ऐतिहासिक पलों को आम लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बनी। फिर चाहे वह 1975 का हॉकी विश्व कप का फाइनल हो या अंतरिक्ष में पहले भारतीय राकेश शर्मा का पहुंचना।

जसदेव ने 1955 में जयपुर में ऑल इंडिया रेडियो में काम करना शुरू किया था। वे आठ साल बाद दिल्ली आ गए। उन्होंने 35 साल तक दूरदर्शन के लिए काम किया। खास यह है कि उन्होंने खुद कभी कोई खेल नहीं खेला।

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