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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. जल्द ही देश में किसान और खेतों का डिजिटल डेटाबेस तैयार होने जा रहा है। इसके लिए किसानों के आधार कार्ड और खेतों की जानकारी को आपस में जोड़ने की तैयारी चल रही है। इस डेटाबेस के जरिए यह आसानी से पता चल पाएगा कि किसी भी किसान के पास देशभर में कहां-कहां और कितने खेत हैं। इस कवायद से किसानों की जमीन के बिक्री में होने वाले फर्जीवाड़े रुकेंगे और फसल बीमा के तहत मुआवजे मिलने में आने वाली परेशानियां दूर होंगी। इस डेटाबेस के लिए सरकार हर एक खेत के यूनिक आईडी नंबर को किसान के आधार नंबर से लिंक करा रही है। इसके अलावा संबंधित किसान की बायोमेट्रिक जानकारियां भी ली जा रही हैं।
अब तक पूरे देश में करीब 6.80 लाख किसानों और उनके खेतों का डाटा जुटाया
राजस्थान, चंडीगढ़ और गुजरात समेत कई राज्यों में यह काम तेजी से कराया जा रहा है। साल 2019 तक सभी किसानों के खेत आधार से लिंक कराने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के लैंड रिसोर्स विभाग सभी राज्य सरकारों के साथ मिलकर पूरे देश में लोकल गवर्नमेंट डायरेक्टरी (एलजीडी) तैयार करा रहे हैं। अब तक पूरे देश में करीब 6.80 लाख किसानों और उनके खेतों का डाटा इसके लिए जमा किया जा चुका है।
हर खेत का अलग कोड
राज्य सरकारों ने सभी खेतों के लिए एक यूनिक आईडी बनाई है। इस यूनिक आईडी में राज्य, जिला, तहसील, ब्लॉक, गांव, खसरा और खेत के लिए अलग-अलग कोड और नंबर बनाए गए हैं। हर राज्यों का नंबर तय किया गया। इन सभी यूनिक आईडी से एक डेटाबेस तैयार किया गया है। इसे एलजीडी नाम दिया गया है।
आधार से जुड़ेगी डायरेक्टरी
एलजीडी से किसान का आधार नंबर और बायोमेट्रिक डिटेल्स लिंक हो जाएंगी। उदाहरण के लिए किसी किसान का एक खेत उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में है और दूसरा खेत हरियाणा के सोनीपत में है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार भी उस किसान के खेत का यूनिक आईडी और आधार नंबर दर्ज कराएगी और यही जानकारियां हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव में भी दर्ज कराई जाएंगी।
इस तरह सारी जानकारी एक जगह आएगी
किसी भी किसान के किसी एक जगह के एलजीडी को सॉफ्टवेयर में डालकर और उसका आधार नंबर डालने से यह पता चल जाएगा कि उस किसान के पास किस-किस राज्य में कहां कितने खेत हैं और उनका आकार कितना है।
एक्ट में होगा संशोधन, गवाह की जरुरत नहीं होगी
सरकार इसके लिए एक्ट में संशोधन कर रही है। अभी तक खेत बेचते समय दो गवाह जरूरी होते हैं लेकिन एक्ट में संशोधन होने के बाद गवाह की जरूरत नहीं पड़ेगी। हर एक खेत के किसान के बायोमेट्रिक से लिंक होगा लिहाजा इसलिए जिस किसान के बायोमेट्रिक डिटेल्स एलजीडी में दर्ज हैं उसकी सहमति के बाद ही जमीन की रजिस्ट्री किसी दूसरे के नाम हो सकेगी।
खरीद-फरोख्त में होने वाला फर्जीवाड़ा रुकेगा
अभी कई ऐसे मामले आते हैं जिसमें किसी दूसरे की प्रॉपर्टी को कागजों में हेराफेरी कर और दो गवाहों के साथ मिलकर तीसरी पार्टी को बेच दिया जाता है। असली मालिक को इसका पता ही नहीं चल पाता। खेतों के यूनिक आईडी और किसान के आधार नंबर और बायोमेट्रिक डिटेल्स आपस में जुड़ जाने से ऐसे फर्जीवाड़े रुकेंगे। फसल को नुकसान होने पर फसल बीमा योजना का लाभ संबंधित किसान को जल्द मिलेगा। जिस किसान का नुकसान हुआ है, उसका एलजीडी और बायोमिट्रिक की पहचान कर हफ्तेभर में मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा किसी खास फसल में किसान कितना फर्टिलाइजर इस्तेमाल कर रहे हैं इसका आकलन भी एलजीडी और आधार के जरिए तैयार इस डेटाबेस से हो सकेगा।
इन राज्यों में चल रहा है काम
राजस्थान, गुजरात, चंडीगढ़, हरियाणा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़
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