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फादर्स डे स्पेशल: पिता सर्वोच्च हैं, इसीलिए तो ईश्वर को परमपिता कहते है

संतान वह है जो पिता को उनकी वर्तमान स्थिति से थोड़ा-सा भी ऊंचा ले जाए।

Danik Bhaskar | Jun 17, 2018, 06:39 AM IST
पिता सारे जहां को जीतने की इच् पिता सारे जहां को जीतने की इच्

नई दिल्ली. परिवार में पिता सर्वोच्च अनुशासन रखते हैं तो समाज में सर्वोच्च पहचान। जब भी सर्वोच्च की बात आती है तो उसे पिता से जोड़ दिया जाता है। वे कहीं फादर ऑफ... हैं, तो कहीं पितामह। वे फादर-पोप-पीर-बापू-बाबा-गॉडफादर और पितृपुरुष भी हैं। हमने ईश्वर को भी परम पिता कहा। यानी वो, जो सबसे ऊपर है वो पिता है।

राष्ट्रपिता: बापू

आजादी की लड़ाई की नई राह बनाने वाले गांधीजी को देश ने औपचारिक रूप से 'राष्ट्रपिता' और प्रेम से 'बापू' कहा। संविधान निर्माता भीमराव अाम्बेडकर को 'फादर ऑफ कॉन्स्टिट्यूशन' और प्रेम सेे 'बाबा साहब' कहा गया। इन सभी संबाेधन में पिता का सम्मान है। निर्माण में जो भी सर्वोच्च जिम्मेदारी लेता है उसे 'फादर ऑफ' कहा जाता है।
- दुनिया के करीब 70 देशों ने राष्ट्र निर्माण में सबसे बड़ी जिम्मेदारी निभाने वाले शख्स को 'फादर ऑफ नेशन' के नाम से संबोधित किया है।

पोप: फादर
पिता के सर्वोच्च रिश्ते का एक और उदाहरण है- धर्मगुरु 'पोप' और चर्च में फादर (पादरी)। सबसे ज्यादा प्रेम और सीख देने वाले। दुनिया के सबसे ज्यादा अनुयायियों वाले धर्म के सबसे बड़े गुरु हैं रोमन कैथाेलिक चर्च के प्रमुख 'पोप'। लेटिन शब्द पापा से बना है पोप। चर्च के फादर के लिए फारसी-उर्दू-हिन्दी में पादरी शब्द प्रचलित है। इसका अर्थ है प्रभु, मालिक या पिता।
- सर्वोच्च सीख देने वाले धर्मगुरुओं को भी बापू कहा गया है। जिसे भी सबसे ज्यादा सम्मान देना हो उसे पितृतुल्य या फादर फिगर कहा जाता है।

गॉडफादर: पितृपुरुष
जीवन बनाने और बदलने वाले गॉडफादर की तलाश सभी को रहती है। गॉडफादर यानी परवरिश या उन्नति में पिता की भूमिका निभाने वाला। सही-गलत का फर्क बताने वाला और अपने क्षेत्र का सबसे प्रभावशाली, अधिकार प्राप्त शख्स। संस्थानों के भी पितृपुरुष होते हैं, जो उन्हें बनाते और विकसित करते हैं। अंग्रेजी में ये फाउंडिंग फादर हैं।
- ऑक्सफोर्ड और कॉलिन्स डिक्शनरी के अनुसार जो व्यक्ति निर्माण शुरू करता है। व्यक्ति, संस्थान या आंदोलन की प्रेरणा बनता है, वह गॉडफादर है।

परमपिता परमेश्वर

जब ईश्वर की सर्वोच्चता को सम्मान देने की बात आई तो हमने उन्हें पिता से जोड़ दिया और उन्हें परमपिता परमेश्वर माना। पिता को परम तपस्या से जोड़ा। यानी जन्म देने वाला, पालनहार, सबसे जिम्मेदार, सम्मानित, महान, सर्वोच्च। ये सब वो खासियतें हैं, जो हर व्यक्ति अपने पिता में देखता है, क्योंकि पिता ही हमें बनाते हैं, सिखाते हैं और हमारा निर्माण करते हैं। इसलिए पिता का रिश्ता सर्वोच्च है।
- महाभारत मेें यक्ष प्रश्न के जवाब में युधिष्ठिर ने कहा था- आकाश से ऊंचा पिता है। पुराणों में जिक्र मिलता है- सर्वदेव मय: पिता। यानी सभी देवता पिता में हैं।

ग्रंथों में लिखा है- हम पिता के लिए क्या करें?

पुं नरकात् त्रायते इति पुत्र:
संतान वह है जो पिता को उनकी वर्तमान स्थिति से थोड़ा-सा भी ऊंचा ले जाए।

सर्वत्र जयमन्विच्छेत्, पुत्रादिच्छेत् पराभवम्।
पिता सारे जहां को जीतने की इच्छा रखते हैं। वे ये भी चाहते हैं कि उनके सारे कीर्तिमान संतान तोड़ दें।
दोनों श्लोकों का सार है- संतान का कर्तव्य तभी पूरा होगा जब वह एक पल के लिए भी पिता केे गर्व का कारण बन सके।