Hindi News »Sports »Other Sports »Football» FIFA World Cup Football Comparison Between Europe And Latin America Teams

फीफा यूराेप v/s लैटिन अमेरिका: 77 देशों ने कम से कम एक बार वर्ल्डकप खेला, खिताब 8 टीमों को

लैटिन अमेरिकी देश 20 साल में सिर्फ एक बार जीता, तीन खिताब जीतकर यूरोप आगे निकला।

Bhaskar News | Last Modified - Jun 09, 2018, 10:24 AM IST

  • फीफा यूराेप v/s लैटिन अमेरिका: 77 देशों ने कम से कम एक बार वर्ल्डकप खेला, खिताब 8 टीमों को, sports news in hindi, sports news
    +1और स्लाइड देखें
    आंद्रेस इनिएस्ता, लियोनेल मेसी और सुआरेज। इनमें इनिएस्ता (स्पेन) यूरोपियन टीम के खिलाड़ी हैं। वहीं मेसी (अर्जेंटीना) और सुआरेज (उरुग्वे) लैटिन अमेरिकी स्टार हैं।

    स्पोर्ट्स डेस्क.वर्ल्ड कप में दुनियाभर की 32 टीमें खेलेंगी। पर खिताब की दावेदार सिर्फ यूरोपीय और लैटिन अमेरिकी टीमें ही हैं। अब तक सभी 20 विश्व खिताब इन दो महादेशों की टीमों ने ही जीते हैं। किसी दूसरे महादेश की टीम तो आज तक फाइनल में नहीं पहुंची है। रूस में यूरोप की 14 जबकि लैटिन अमेरिका की पांच टीमें शामिल हो रही हैं। इसके अलावा एशिया और अफ्रीका की पांच-पांच जबकि अमेरिकन-कैरेबियन की तीन टीमों को शामिल होने का मौका मिला है। इनमें से 20 टीमें 2014 में भी उतरी थीं।

    8-8 से रिकॉर्ड था बराबर

    2000 के पहले लैटिन अमेरिकी और यूरोपीय दोनों देशों की टीमों ने 8-8 बार खिताब जीता था। लेकिन 21वीं सदी में यूरोपीय देशों का दबदबा रहा है। अब तक हुए चार में से तीन खिताब यहीं की टीमों ने जीते हैं। इस कारण 21वीं सदी को यूरोपियन देशों का कहा जा रहा है। 2006 में इटली, 2010 में स्पेन और 2014 में जर्मनी ने खिताब जीता। 2002 में ब्राजील जीता।

    2006 में टॉप-4 में कोई टीम नहीं

    यूरोपीय धरती पर अंतिम बार 2006 में जर्मनी में वर्ल्ड कप खेला गया। दक्षिण अमेरिका की कोई भी टीम पहले चार में जगह नहीं बना सकीं। इटली ने खिताब जीता, जबकि फ्रांस दूसरे नंबर पर रहा। जर्मनी तीसरे पर रहा। ब्राजील ने 1998 में फ्रांस में हुए टूर्नामेंट में दूसरा स्थान हासिल किया था। इटली में 1990 में हुए वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना रनरअप रहा था।

    ब्राजील के नाम सबसे ज्यादा जीत

    ब्राजील ने अब तक 20 वर्ल्ड कप के 104 मैचों में 70 जीते हैं। टीम में इन मुकाबलों में कुल 221 गोल किए हैं। वहीं जर्मनी ने अब तक 18 वर्ल्ड कप के 106 मैचों में 66 में जीत दर्ज की है। टीम ने हालांकि सबसे ज्यादा 224 गोल करने का रिकाॅर्ड भी बनाया है। यही दो टीम अब तक 100 या उससे अधिक मैच खेल सकी हैं।

    2002 के बाद से लैटिन अमेरिका की कोई भी टीम चैंपियन नहीं बनी

    - लैटिन अमेरिका के लियोनेल मेसी और नेमार वर्ल्ड कप के बड़े स्टार हैं, लेकिन पिछले चार वर्ल्ड कप में से तीन खिताब यूरोपियन टीमों ने ही जीते। अंतिम बार 2002 में ब्राजील चैंपियन बना। अंतिम तीन वर्ल्ड कप की बात की जाए तो यूरोपियन देश ही विजेता बने।

    - इतना ही नहींं यूरोपीय जमीन पर 10 वर्ल्ड कप अब तक खेले गए हैं। इनमें से केवल एक बार लैटिन अमेेरिकी टीम जीत सकी है। वो भी 60 साल पहले। 1958 में ब्राजील ने स्वीडन में खिताब जीता था।

    - इस कारण रूस में होने जा रहे 21वें वर्ल्ड कप में यूरोपियन देशों को बड़ा दावेदार माना जा रहा है। यूरोप की पांच और लैटिन अमेरिका की तीन टीमोें ने अब तक वर्ल्ड कप अपने नाम किया है। 2014 के सेमीफाइनल में जर्मनी ने ब्राजील को और फाइनल में अर्जेँटीना को हराया।

    ये हैं यूरोप के दबदबे की चार वजह

    1. ज्यादातर समय खिलाड़ी यूरोप के क्लबों से ही खेलते हैं

    लियोनल मेसी, लुईस सुआरेज, मार्सेलो, नेमार, हिगुअन, डी मािरया जैस बड़े लैटिन अमेरिकी खिलाड़ी यूरोपियन लीग में खेल रहे हैं। इससे वहां की टीमें उनके खेलने की स्टाइल को समझ गई हैं। इस कारण उनके खेलने की स्टाइल में भी बदलाव आ गया है। अब सभी टीमें अपने डिफेंस पर काफी ध्यान देने लगी हैं।

    2. लैटिन अमेरिकी टीमें एक स्टार पर हैं अधिक डिपेंडेंट

    लैटिन अमेरिकी टीमें एक खिलाड़ी पर डिपेंडेंट हैं। 2014 में नेमार के बाहर होने पर ब्राजील अपनी जमीन पर सेमीफाइनल मैच 7-1 से हार गई। अर्जेंटीना मेसी और ऊरुग्वे की टीम लुईस सुआरेज के प्रदर्शन पर निर्भर करती हैं। वहीं अगर जर्मनी, फ्रांस और स्पेन की बात करें तो ये एक इकाई के रूप में खेलती हैं।

    3. स्पोर्ट्स साइंस और रिसर्च के मामले में भी यूरोप है आगे

    यूरोपियन देशों में स्पोर्ट्स से जुड़े कई रिसर्च सेंटर हैं। इस पर हर साल कराेड़ों डॉलर खर्च हो रहे हैं। खिलाड़ियों की डाइट से लेकर उनके इंजरी को जल्द से जल्द दूर करने पर रिसर्च हो रहे हैं। कई टीमों के पास अपने खिलाड़ियों का डाटा भी है। वहीं लैिटन अमेरिकी देश रिसर्च के मामले में यूरोप से काफी पीछे हैं। यूरोप में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी भी लैटिन अमेरिकी देशों से कहीं ज्यादा हैं।

    4. अटैक के लिए जाने जाते हैं अब डिफेंस पर अधिक ध्यान

    दक्षिण अमेरिकी टीमें पहले शानदार स्ट्राइकरों के दम पर यूरोपीयन टीमों को हराती रही हैं। लेकिन, अब यूरोप की अधिकांश टीमों का डिफेंस लेवल काफी मजबूत हो गया है। अब पर्सनल ब्रिलिएंस के आधार पर उसको मात दे पाना काफी मुश्किल काम है। इस वजह से अटैकिंग रणनीति पहले की तरह उतनी कारगर नहीं रही। लिहाजा ये टीमें भी अब डिफेंसिव हो रही हैं।

    8 टीमों में विदेश में जन्मे खिलाड़ियों की संख्या 10 फीसदी से ज्यादा

    अपने देश के लिए वर्ल्ड कप में खेलना हर फुटबॉलर का सपना होता है। कई फुटबॉलर ऐसे होते हैं जिनके पास एक से अधिक देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका होता है। इस वर्ल्ड कप में भी कई देशों के पास ऐसे खिलाड़ी हैं जिनका जन्म उस देश में नहीं हुआ था। मोरक्काे की टीम में 14 ऐसे खिलाड़ी हैं।

    इन देशों के पास विदेश में जन्मे ज्यादा खिलाड़ी

    मोरक्को61.5%
    सेनेगल39.4%
    पुर्तगाल32.1%
    स्विट्जरलैंड31.0%
    ट्यूनिशिया23.5%
    क्रोएशिया15.4%
    नाइजीरिया11.4%
    फ्रांस10.0%

    - जून-जुलाई महीने में रूस की यात्रा की बुकिंग कराने वाले भारतीयों की संख्या में 400 % का इजाफा हुआ है। 48 % अकेले रूस जा रहे हैं।

  • फीफा यूराेप v/s लैटिन अमेरिका: 77 देशों ने कम से कम एक बार वर्ल्डकप खेला, खिताब 8 टीमों को, sports news in hindi, sports news
    +1और स्लाइड देखें
Topics:
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: FIFA World Cup Football Comparison Between Europe And Latin America Teams
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Football

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×