मां बनने से पहले और बादमें फाइनेंशियल प्लानिंग
पै रेंट बनना रोमांचक है लेकिन इससे जुड़े खर्चे भी कम नहीं होते। एक हालिया सर्वे के अनुसार 42% दंपती कहते हैं कि वे बच्चे पैदा करने के लिए आर्थिक रूप से तैयार नहीं हैं। चाहे बात नन्हे मेहमान के आने की या परवरिश की, कॉलेज फीस के लिए बचत से लेकर बीमा तक के लिए बहुत सारे फैसले लेने पड़ते हैं। इसलिए फैमिली प्लानिंग से पहले बच्चों के लिए फाइनेंशियल प्लान बनाना जरूरी है। आज हम नए पैरेंट्स के लिए फाइनेंस से जुड़ी कुछ टिप्स बता रहे हैं।
मां बनने से पहले
अपने पति के साथ बैठकर फाइनेंस पर चर्चा करें। नए फैमिली मेंबर के आने से पहले पैसों के बारे में बात करने से नकारात्मक स्थिति से बच सकती हैं। वित्तीय पारदर्शिता बेहतर करने के लिए एक साथ बजट बनाएं। डिजिटलाइजेशन की वजह से खर्च पर नजर रखने के लिए बहुत सारे एप्स हैं। हर महीने के खर्च का रिकॉर्ड बनाएं। सभी खर्चों पर ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर इन्हें कम करें। सुनिश्चित करें कि आप बचत करें। आपातस्थिति के लिए तीन से छह महीने का खर्च बचाना महत्वपूर्ण है। यदि कोई पुराना कर्जा है, तो इसे जल्द से जल्द चुकाने की योजना बनाएं। फैमिली प्लानिंग से बहुत पहले ही सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में निवेश शुरू कर दें।
मैटरनिटी लीव और
जीवन बीमा
नौकरी करती हैं तो अपने बेनिफिट्स पैकेज में देखें कंपनी कितना मातृत्व अवकाश देती है। कई बार गर्भवती महिलाओं को मेडिकल इंश्योरेंस भी मिलता है। जब आप गर्भवती हों तो किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए मातृत्व बीमा योजना (मैटरनिटी लाइफ इंश्योरेंस) जरूर कराएं या अपना लाइफ इंश्योरेंस अपडेट करें। बच्चा होने पर अपनी पॉलिसी अपडेट कर सकती हैं, जैसे कि अपने बच्चे का नाम अपने साथी के लाइफ इंश्योरेंस में जोड़ सकती हैं। कई बार बीमा होने के बावजूद बच्चे की डिलीवरी महंगी पड़ जाती है। ऐसे वक्त में इमरजेंसी फंड्स काम आते हैं। कम पैसों में अच्छी देखभाल पाने के लिए पहले से रिसर्च भी कर सकती हैं। प्रसूति-विशेषज्ञ और अस्पताल के बारे में अच्छे से सब कुछ जान लें। यदि आपका प्लान पैसों की बचत करता है, तो इन पैसों को स्वास्थ्य बचत खाते में जमा करें। मातृत्व स्वास्थ्य बीमा, मातृत्व और अन्य खर्चों के लिए कवरेज प्रदान करता है। यह बीमा बच्चे के जन्म से पहले और बाद तक की सेवाएं प्रदान करता है (नॉर्मल हो या सी-सेक्शन/सिजेरियन)। मातृत्व स्वास्थ्य बीमा के तहत दी जाने वाली सेवाएं मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट के अंदर आती हैं।
माता-पिता के लिए
जीवन बीमा
ऑफिस के जीवन बीमा का कवरेज अक्सर पर्याप्त नहीं होता है। यदि पहले से ही कोई पॉलिसी है तो सुनिश्चित करें कि ये बढ़ते परिवार के लिए पर्याप्त है। सर्वे के अनुसार प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस वाले माता-पिता, बिना प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस वाले माता-पिता की तुलना में आर्थिक रूप से तैयार महसूस नहीं करते।
मां बनने के बाद
काम पर वापस जाना और डे-केयर चुनना आसान नहीं होता। बच्चे की देखभाल के लिए परिवार अक्सर वार्षिक कमाई का एक बड़ा हिस्सा देते हैं। स्थिति के आधार पर, इसकी कीमत एक विवाहित जोड़े की औसत आय के लगभग 18% तक पहुंच सकती है। होम डे केयर, रेग्युलर डेकेयर से ज्यादा किफायती होते हैं। बच्चा होने से पहले बचत और एसआईपी जैसे विकल्पों में निवेश की जो आदत बनी थी, इसे बच्चा होने के बाद भी जारी रखने की कोशिश करें।
अजय केडिया, केडिया एडवाइजरी, मुंबई
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