--Advertisement--

Birthday Spl : टुनटुन से शादी करने पाकिस्तान छोड़ भारत आ गए थे काजी, खुद दिलीप कुमार की थीं दीवानी

टुनटुन का करियर 1947 में फिल्म दर्द के गीत अफसाना लिख रही हूं.. से शुरू हुआ था। पहला रोल 1950 में फिल्म बाबुल में मिला।

Danik Bhaskar | Jul 11, 2018, 02:10 PM IST
  • 1990 में आई फिल्म 'कसम धंधे की' टुनटुन के अभिनय वाली आखिरी फिल्म थी।
  • कारदार स्टूडियो ने उमा देवी खत्री यानी टुनटुन को 500 रुपए महीने की नौकरी पर रखा था

बॉलीवुड डेस्क. 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बीच अख्तर अब्बास काजी को भी लाहौर (पाकिस्तान) जाना पड़ा। टुनटुन जब दिल्ली में अपने रिश्तेदारों के साथ रहती थीं, तब काजी एक्साइज ड्यूटी इंस्पेक्टर हुआ करते थे। काजी अक्सर उमा देवी की मदद किया करते थे, जिसके कारण उमा उनसे बहुत प्रभावित हुईं थीं। काजी के चले जाने के बाद उमा देवी को भी दिल्ली रास नहीं आई। वे अपने गाने के शौक को पूरा करने घर से भाग कर मुंबई आ गईं।

लाहौर में नहीं लगा काजी का मन : बंटवारे की त्रासदी के चलते काजी का मन लाहौर में नहीं लगा। कुछ ही समय बाद वे भी मुंबई आ गए। काजी और उमा देवी ने 1947 में ही शादी कर ली। उस वक्त उमा देवी की उम्र 24 साल थी।

- उमा देवी ने अफसाना लिख रही हूं.. के बाद तकरीबन 47 गीतों को अपनी आवाज दी। वहीं 200 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय भी किया।

दिलीप कुमार ने बना दिया था टुनटुन : उमा देवी ने शादी के बाद फिल्मों में गाना बंद कर दिया था। परिवार चलाने की मजबूरी में उन्होंने दोबारा काम की तलाश नौशाद के पास ले आई। नौशाद ने उमा से कहा कि अब तुम्हें फिल्मों में काम करना चाहिए। लेकिन यहां भी उमा ने एक शर्त रख दी कि वे सिर्फ पसंदीदा एक्टर दिलीप कुमार के साथ ही काम करेंगी।

- उस वक्त दिलीप कुमार बाबुल की शूटिंग कर रहे थे। उमा देवी के साथ एक सीन करते समय दिलीप कुमार ने ही उन्हें टुनटुन नाम दिया था। तब से आज तक उमा देवी को टुनटुन नाम से ही पहचाना जाता है।

लता नहीं टुनटुन गाने वाली थीं यह गाना : 1949 में कमाल अमरोही की फिल्म 'महल' का गाना आएगा आने वाला.. पहले उमा देवी गाने वाली थीं। लेकिन कारदार स्टूडियो के साथ अनुबंधित होने के कारण वे किसी और स्टूडियो की फिल्मों में नहीं गा सकती थीं। इसलिए मजबूरन कमाल अमरोही ने यह गाना लता मंगेशकर काे दिया।

- इस गीत के बाद लता मंगेशकर फिल्म इंडस्ट्री की सबसे पसंदीदा अावाज बन गई थीं।