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जहां प्रेक्टिस से मिली है नौकरी, हर लड़का उस स्टेडयम को इसलिए आज भी देता है पहली सैलरी

3 वर्ष पहले
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जींद (पानीपत). एक स्टेडियम ने जींद जिले के करसिंधु गांव की तस्वीर बदल दी है। स्टेडियम गांव की तस्वीर कैसे बदल सकता है।  यह सुनने में थोड़ा ताज्जुब होता है, लेकिन करसिंधु गांव के युवा इसे अच्छी तरह से बता सकते हैं कि स्टेडियम उनका भविष्य बनाने में कितना कारगर साबित हुआ है। 10-15 लोग से ऐसे हुए 105 खिलाड़ी...

 


- कुछ साल पहले तक गांव के 10-15 युवा ही बड़ी मुश्किल से आर्मी  व पुलिस में नौकरी कर रहे थे। वहीं अब पिछले दो साल का जिक्र करें तो 109 युवा आर्मी व पुलिस में भर्ती हो गए। 

- इनमें गांव की 14 बेटियां भी शामिल हैं। जो पिछले दिनों चंडीगढ़, हरियाणा व दिल्ली पुलिस में भर्ती  हुई हैं। यह सब युवाओं द्वारा स्टेडियम में सुबह-शाम की कड़ी मेहनत से हो पाया है।

- गांव के सरपंच से लेकर  ग्रामीणों का कहना है कि जब से गांव में स्टेडियम बना युवाओं में प्रैक्टिस करने व खेलों के प्रति क्रेज बढ़ा है।  

- पहले युवा आर्मी-पुलिस के फिजीकल क्लियर नहीं कर पाते थे, लेकिन अब हर भर्ती में नौकरी पर लग रहे हैं। नौकरी मिलने पर  गांव के युवा पहली सैलरी से कुछ हिस्सा स्टेडियम के रखरखाव, सुविधाओं के लिए देते हैं, जो युवा नौकरी लग कर स्टेडियम में दान देता है बाकायदा उसका, पिता का व किस विभाग में किस पर नौकरी लगा गेट पर लगे बोर्ड में दर्ज होता है।

- गांव के  युवाओं ने मिली सफलता पर स्टेडियम में ही एक मंदिर बनवा दिया है।    

 

109 युवाओं को मिल चुकी नौकरी

 

- कोच अशोक कुमार बताते हैं कि गांव के युवाओं में खेलों व सुबह-शाम प्रैक्टिस करने के प्रति काफी क्रेज है, इसमें  बेटियां भी पीछे नहीं है।

- स्टेडियम प्रैक्टिस कर जब युवाओं को फौज, पुलिस में नौकरी मिली तो गांव के दूसरे युवा भी  इससे प्रेरित हुए।

 

3 साल से बना क्रेज : सरपंच 

 

- करसिंधु गांव के सरपंच नरेश कुमार ने बताया कि गांव में पहले युवाओं के प्रैक्टिस करने के लिए कोई सही स्थान नहीं था।

- तीन साल पहले गांव में स्टेडियम बनकर तैयार  हुआ तो युवाओं में खेलों व प्रैक्टिस करने के प्रति रुझान बढ़ा।

- इसका परिणाम है कि दो साल में गांव के 109 युवा  आर्मी व पुलिस में भर्ती हो गए।