पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंपटना. सूखा और बाढ़ से तालाब में मछली की क्षति होने पर किसानों को मुआवजा मिल जाएगा। चाहे बीमारी से मछली मरी हो या किसी प्राकृतिक आपदा बज्रपात आदि से भी मछली नष्ट हुई हो मछलीपालक को नुकसान की भरपाई हो जाएगी। जहर डाल कर मार दी या चोरी चली गई तब भी मुआवजा मिलेगा।
मछलीपाकों को ऐसे नुकसान से बचाने के लिए अब राज्य में मछली का बीमा होगा। 2018-19 से नए प्रावधानों के आधार पर मछलियों को बीमा होगा। मछली पालकों को मछली बिक्री स्थल तक ले जाने के लिए सरकार 40 प्रतिशत अनुदान देगी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह योजना मोतिहारी और खगड़िया से शुरू हो रही है। गुरुवार को जिला मत्स्य पदाधिकारियों के साथ दो दिवसीय बैठक के बाद पशु व मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस ने पत्रकारों को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले 2016-17 में 5.09 लाख टन मछली उत्पादन 2017-18 में बढ़ कर 5.87 लाख टन हो गया है। हालांकि राज्य में मछली की सालाना खपत 6.42 लाख टन है, यानी जरूरत से लगभग 85 लाख टन कम मछली का उत्पादन हो रहा है। उत्पादन बढ़ाने के लिए मछली पालन के लिए सामान्य किसानों व मछलीपालकों को 50 प्रतिशत और एससी-एसटी के किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
पिछले साल 11 मत्स्यबीज हैचरी का निर्माण किया गया है। अब राज्य में निजी क्षेत्र में कुल 142 मत्स्य बीज हैचरी हो गयी है, जिसमें से 115 हैचरी कार्यशील हैं। जलकर बंदोबस्ती से राजस्व 10.48 करोड़ मिला। अब तक राजय के कुल 30040 मछलीपालकों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें 10235 मत्स्य पालकों राज्य से बाहर मत्स्य पालन का प्रशिक्षण दिलाया गया।
मत्स्य निदेशक निशात अहमद ने कहा कि 2016-17 में 3002.37 लाख मछली बीज का उत्पादन हुआ था, जो 2017-18 में बढ़ कर 3730.47 लाख हो गया है। मछली बीज उत्पादन में 24.25 प्रतिशत वृद्धि हुई है। 213.75 हेक्टेयर नये जलक्षेत्र से बढ़ कर 522.11 हेक्टेयर यानी 144 प्रतिशत हो गया है। पहली बार 5 छोटा फिशफीड मिल और एक बड़ा फीड मील के लिए लाभुक का चयन किया गया है, जिसमें 2 फिश फीड मील स्थापित हो चुका है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.