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भगवान को मनाने के 5 तरीके : इष्टदेव के नाम का जाप करेंगे तो पूरी हो सकती हैं सभी मनोकामनाएं

सिर्फ मंत्र जाप ही नहीं 4 तरीके और हैं, जिनसे घर में बढ़ती है खुशहाली

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 01:39 PM IST

रिलिजन डेस्क। कुंडली के दोष और जीवन की परेशानियां दूर करने के लिए भगवान की पूजा करने की अलग-अलग विधियां या तरीके बताए गए हैं। सभी विधियों का अलग-अलग महत्व है। उज्जैन के भागवत कथाकार पं. मनीष शर्मा के अनुसार शास्त्रों में भगवान को प्रसन्न करने के कई रास्ते बताए गए हैं। यहां जानिए 5 प्राचीन विधियां, जिनसे भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

> पहली विधि है जिस देवी-देवता के लिए पूजा करनी है, उन देवी-देवताओं के मंत्रों का या इष्टदेव के नामों का जाप करना। रोज अपने इष्टदेव की पूजा मंत्रों जाप के साथ की जाए तो पैसों से जुड़ी कई परेशानियां दूर हो सकती हैं। मंत्र जैसे ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ नम: शिवाय, ऊँ रामदूताय नम:, ऊँ रुद्राय नम: आदि। आप चाहें तो देवी-देवताओं में नामों का जाप भी कर सकते हैं। जैसे जय श्रीराम, सीताराम, जय श्रीकृष्णा, राधाकृष्णा आदि।

> दूसरी विधि है होम या यज्ञ करना। पुराने समय ही भगवान का प्रसन्न करने का सर्वश्रेष्ठ उपाय है यज्ञ करना। आज भी यज्ञ से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त की जाती है।

> तीसरी विधि है संबंधित देवता के नाम पर दान करना। शास्त्रों के अनुसार दान करने से भी हमारी परेशानियां दूर हो सकती हैं। अगर कुंडली में कोई ग्रह दोष है तो उसके निमित्त दान करने पर शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं।

> चौथी विधि है तप करना। तप या तपस्या पुराने समय में भगवान को मनाने की सर्वाधित प्रचलित विधि रही है। तप से भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं। इस विधि से कई असुरों ने भगवान को प्रसन्न किया था और मनचाहा वरदान प्राप्त किया था।

> अंतिम पांचवी विधि है देवी-देवताओं की प्रतिमा या चित्र पर सोलह उपचारों से पूजा करना। इस विधि का उपयोग आज के समय में काफी अधिक किया जाता है।

कोई भी व्यक्ति इन पांच में से किए एक विधि से भी नियमित आराधना करता है तो उसकी परेशानियां खत्म हो सकती हैं।

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