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गांव में नहीं है स्कूल, पढ़ने का ऐसा जुनून कि पढ़ने के लिए नाव चलाकर दूसरे गांव जाते हैं बच्चे

3 वर्ष पहले
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 फिरोजपुर(जालंधर). तीन तरफ नदी से घिरा और चौथी तरफ पाकिस्तान से सटा सीमा के अंतिम गांव कालूवाला में कोई स्कूल नहीं है। दरिया पार स्कूल है लेकिन पुल न होने से बच्चे आना-जाना नहीं कर पाते। एेसे में गांव के मलकीत ने पढ़ने की ठानी और खुद नाव चलाकर दरिया पार गांव गटी राजोके के स्कूल में पढ़ने चला गया।  सिलसिला यूं ही चलता रहा। मलकीत को देखकर चार और बच्चों ने भी स्कूल जाना शुरू किया। मलकीत की मेहनत रंग लाई और हाल ही में उसने दसवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की है। उसकी इस उपलब्धि पर गांव में लोगों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई। कहा- मुश्किलें कुछ नहीं लगतीं...


मलकीत के अलावा मनदीप, सुखविंद्र व गगनदीप 9वीं में और जगदीश 8वीं में पढ़ रहे हैं। नंबरदार बचन सिंह ने बताया, कुछ साल पहले गांव के 2 बच्चों कुलदीप और मंगल ने 10वीं की थी और बाद में वे बीए भी कर गए थे, लेकिन वे दूसरे गांवों में रह कर पढ़े। उनसे पहले कोई पढ़ा नहीं था। इन बच्चों का हौसला देख गर्व होता है। पांचों बच्चों का कहना है कि हमारा  सपना पढ़ना है और इसके आगे मुश्किलें कुछ नहीं लगतीं।  मलकीत ने बताया कि अब 11वीं में नॉन मेडिकल लूंगा और   इंजीनियर बनूंगा। गटी राजोके स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. सतिंद्र सिंह ने कहा, इन बच्चों का  हौसला  इन्हें सफलता जरूर दिलाएगा। 

 

बरसात में पानी बढ़ने पर भी स्कूल जाना नहीं करते बंद

 

बच्चे बताते हैं बरसात में 2 माह तक दरिया में पानी बढ़ जाता है। बहाव भी तेज हो जाता है। नाव को चलाना कठिन हो जाता है लेकिन कभी स्कूल जाना बंद नहीं किया।