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बीमारी के अनुसार तय करें डाइट प्लान, मिलती है राहत

हार्ट डिजीज, किडनी प्रॉब्लम और अस्थमा में खानपान से बदलाव से काफी सुधार किया जा सकता है।

Danik Bhaskar | May 25, 2018, 05:20 PM IST
अधिक नमक व तली-भुनी चीजें ये बीपी और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती हैं। अधिक नमक व तली-भुनी चीजें ये बीपी और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती हैं।

यूटिलिटी डेस्क. खानपान हमें एनर्जी देने के साथ बीमारियों से भी बचाता है। ऐसा तब संभव है जब पता हो कि किस बीमारी में क्या खाना चाहिए। हार्ट डिजीज, किडनी प्रॉब्लम और अस्थमा में खानपान से बदलाव से काफी सुधार किया जा सकता है। साथ ही कुछ खास चीजों से परहेज करने की भी सलाह दी जाती है। डाइटीशियन सुरभी पारीक से जानते हैं किस बीमारी में कैसा हो खानपान...

हृदय रोग और ब्लड प्रेशर

ये खाएं ये न खाएं
सेब, अमरूद, कीवी और पपीता खा सकते हैं। अधिक नमक व तली-भुनी चीजें ये बीपी और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती हैं।
हरी-पत्तेदार सब्जियां ले सकते हैं। सूजी-मैदा से बने और अधिक फैट वाले फूड।

डाइट में साबुत और अंकुरित अनाज शामिल करें।

बेकरी प्रोडक्ट्स लेने से बचें इनमें नमक की मात्रा अधिक होती है।

खाने में ऊपर से नमक डालने से बचें।

डायबिटीज

ये खाएं ये न खाएं
हर दो घंटे में कुछ जरूर खाएं इससे ग्लूकोज लेवल नियंत्रित रहता है। चुकंदर, आलू, शकरकंद, केला, तरबूज व खरबूजा से दूर रहें।
जौ-चना व गेहूं के आटे की रोटी खाएं, इनमें फायबर अधिक होता है। ब्रेड, पास्ता, चावल में फायबर कम होता है और ब्लड शुगर बढ़ाते हैं।

छाछ के अलावा रोजाना दो फल डाइट में जरूर शामिल करें।

फ्रूट के साथ दही न लें, इसकी जगह सादा दही लेना बेहतर है।

फलों का रस, ड्राई फ्रूट और शुगर वाली चीजें लेने से बचें।

अस्थमा

ये खाएं ये न खाएं
फल जैसे अंगूर, सेब, अमरूद, संतरा, स्ट्राबेरी ले सकते हैं। ठंडी और खट्टी चीजों से दूर रहें।
ऐसी चीजें लें जिसमें विटामिंस, मिनिरल्स और प्रोटीन हो। ऐसी चीजें जो एलर्जी का कारण बनती हैं, उनसे दूर रहें।

हरी पत्तेदार सब्जियां व पत्तगोभी जरूर डाइट में लें।

कार्बोनेटेड ड्रिंक, तली-भुनी चीजें, प्याज और लहसुन।

किसी तरह के केमिकल से तैयार होने वाले फूड।

किडनी पेशेंट्स

ये खाएं ये न खाएं
शरीर में पानी की कमी न होने दें, 8-10 गिलास पानी पीएं। हरी पत्तेदार सब्जियों को उबालकर ही प्रयोग करें।
सब्जियों में पत्तागोभी, गाजर, खीरा लेना बेहतर है। फास्फोरस युक्त चीजें जैसे कोला, मीट, मछली लेने से बचें।

स्ट्राबेरी, रसबेरी और ब्लूबेरी जैसे फल डाइट में शामिल करें।

मक्खन लेने से बचें इसमें हाई सेचुरेटेड फैट होता है।

सोडा में केमिकल और शुगर की मात्रा अधिक होती है।

हर दो घंटे में कुछ जरूर खाएं इससे ग्लूकोज लेवल नियंत्रित रहता है। हर दो घंटे में कुछ जरूर खाएं इससे ग्लूकोज लेवल नियंत्रित रहता है।