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एक्सपर्ट इंटरव्यू : लिगामेंट्स और टखनों के डैमेज होने का एक कारण फ्लिप-फ्लॉप यानी स्लीपर

गलत फ्लिप-फ्लॉप के चयन से फ्लैट फीट सिंड्रोम का खतरा रहता है।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 10, 2018, 05:09 PM IST

एक्सपर्ट इंटरव्यू : लिगामेंट्स और टखनों के डैमेज होने का एक कारण फ्लिप-फ्लॉप यानी स्लीपर

हेल्थ डेस्क.फ्लिप-फ्लॉप को आरामदेह फुट​वियर माना जाता है। दिनभर बंद जूते या सैंडल पहनने के बाद फ्लिप-फ्लॉप पहनना काफी सुखद लगता है। ज्यादातर लोग नहीं जानते कि अगर सही फ्लिप-फ्लॉप यानी रेग्युलर स्लीपर नहीं चुन रहे हैं तो पैरों को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। गलत फ्लिप-फ्लॉप के चयन से फ्लैट फीट सिंड्रोम का खतरा रहता है। इसलिए इसका चयन सावधानी से किया जाना जरूरी है।ब्रीच कैंडी हॉस्प्टिल मुंबई के आॅर्थोपीडिक सर्जन डॉ. प्रदीप मुणोत से जानते हैं इसके बारे में...

सवाल : गलत फ्लिप-फ्लॉप कैसे पैरों को नुकसान पहुंचाता है?
जवाब:
गलत फ्लिप-फ्लॉप पहनने से लंबे समय तक तलवों को पर्याप्त सर्पोट नहीं मिल पाता है, जिससे लिगामेंट्स में खिंचाव आ सकता है। यह एड़ियों और टखनों में दर्द का सबसे प्रमुख कारण है। पैरों को पूरा सहारा न मिल पाने से टखना एक ओर घूम सकता है। इससे लिगामेंट्स टूटने का खतरा होता है या टखनों की मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है। अगर चलते समय फ्लिप-फ्लॉप पर ग्रिप बनाने के लिए अपनी पैर की उंगलियों को खींचना पड़े तो इससे पंजों की मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव आ जाएगा। इससे हैमरटोज़ की समस्या हो सकती है। पैरों की इस विकृति में दूसरी, तीसरी या चौथी उंगली जोड़ की ओर से मुड़ जाती है और हैमर या हथौड़े के समान दिखने लगती है। गलत साइज़ की फ्लिप-फ्लॉप पहनने से घुटनों, कूल्हों या कमर में दर्द हो सकता है। इससे लिगामेंट्स पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। घुटनों और कमर के निचले हिस्से की मांसपेशियों पर भी दबाव पड़ता है।

सवाल: कैसे चुनें सही फ्लिप-फ्लॉप?
जवाब:
अगर इसका उपयोग थोड़े समय के लिए करना है तो मुलायम फ्लिप—फ्लॉप का चयन करें। अगर बहुत अधिक चलना है तो ऐसी पहनें जो मज़बूत हों और पैरों को उपयुक्त सहारा दें। फुट​वियर 'फुटबेड' कहा जाता है इसलिए फुटवेयर का सोल किस मैटेरियल का है वह सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। प्ला‍स्टिक या फोम का सोल तलवों को उपयुक्त सहारा नहीं दे पाता है। एथीलीन और विनाइल एसिटेट को पॉलीमर इवीए (इिथलीन विनाइल एसिटेट) भी कहते हैं। यह सोल सबसे बेहतर माना जाता है। यह मुलायम और लचीला होता है तथा पैरों को उचित सहारा देता है।

सोल की डिजाइन का भी असर
सही सोल के चयन के साथ सोल की डिज़ाइन भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कुछ सोल दिखने में अच्छे होते हैं, पर नीचे से चिकने होते हैं जिससे गीली सतह पर फिसलने और गिरने का ख़तरा होता है। ऐसे सोल वाले फ्लिप-फ्लॉप खरीदें जिसकी नीचे की ओर ग्रिप डिज़ाइन हो। यह सतह के साथ थोड़ा घर्षण करते हैं और इससे फिसलने का ख़तरा भी कम होता है।

स्ट्रैप्स मोटे होने चाहिए
पैरों को अच्छा सहारा और आराम देने के लिए स्ट्रैप्स यानी बद्दियों को जांचे। ऐसे फ्लिप-फ्लॉप का चयन करें जिसके स्ट्रैप्स मोटे हों और पैर में फिट आएं और अंदर की ओर मुलायम हों ताकि इससे पैरों की त्वचा को नुकसान न पहुंचे। प्लास्टिक की स्ट्रैप्स भी न चुनें।

हील में ध्यान रखिए कम्फर्ट का
हील का चयन करते समय कम्फर्ट लेवल का भी ध्यान रखिए। अगर सुविधा महसूस करते हों और कम समय के लिए पहनें, तो मध्यम और ऊंची एड़ी का चयन कर सकते हैं।

सवाल: कब नहीं पहननी चाहिए?
जवाब:
लंबे समय तक एक ही फ्लिप-फ्लॉप को न पहनें। अगर यह घिस जाए तो इसे बदल लें। अधिक दूर पैदल चलने के लिए फ्लिप-फ्लॉप का उपयोग नहीं करना चाहिए। कोई खेल खेलते समय फ्लिप-फ्लॉप न पहनें। इससे पैर या एड़ियां मुड़ सकती हैं। चोट लगने की आशंका भी अधिक रहती है।

सवाल: क्या है फ्लैट फुट सिंड्रोम ?
जवाब:
फ्लैट फुट का मतलब तलवों में घुमाव (आर्च) होने के बजाए पूरी तरह समतल होना है। ऐसा होने से पैरों में भार वहन करने की क्षमता कम हो जाती है। फ्लैट फुट वाले लोग तेज़ नहीं दौड़ सकते। उनके पैरों में दिक्कत होती है। कमर दर्द की शिकायत भी हो सकती है। यह समस्या तलवों की मांसपेशियों के कमज़ोर होने, पांव की हड्डियों की संरचना के असामान्य होने, गलत डिजाइन के फैंसी जूते और चप्पल का प्रयोग करने से हो सकती है।

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