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देश में पहली बार: ऑर्डर देकर जेल का खाना डिलिवर होगा आपके घर, मिठाई और स्टार्टअप भी

3 वर्ष पहले
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चंडीगढ़.  अक्सर कुछ लोगों को पंडित जेल की रोटी खाने की हिदायतें देते हैं, लेकिन लोग जेल की रोटी को मुहैया करवाने में असमर्थ होते हैं। अब यदि जेल की रोटी खानी है तो ऑर्डर करने पर आपके घर तक खाना पहुंचेगा। जेल प्रशासन ने  देश की पहली ऑनलाइन शॉपिंग साइट chdmodeljail.gov.in तैयार की है। इससे आप किसी भी पार्टी के लिए खाना, मिठाई और स्टार्टअप मंगवा सकते हैं। इतना ही नहीं यदि आपको बल्क में खाना चाहिए तो आपकी पार्टी तक खाना भी पहुंचेगा। यह सुविधा ट्राईसिटी के लोगों के लिए है।

 

जेल प्रशासन का दावा बाहर के मुकाबले सस्ता और बेहतर मिलेगा सामान

 

इस साइट के जरिए आप घर बैठे ही ऑर्डर दे सकते हैं। साइट पर ऑनलाइन रेट लिस्ट है और सामान की लिस्ट है। यदि आप सामान मंगवाते हैं ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने पर बैंक की तरफ से कोई भी एक्सट्रा चार्ज नहीं लगेंगे। वहीं जेल प्रशासन का दावा है कि यदि आप इस साइट के जरिए ऑर्डर मंगवाते हैं तो आपको सस्ता और अच्छा खाना व अन्य सामान मिलेगा।

 

 

क्या होती है एक्टिविटी दिखेगा साइट में

इस साइट के तैयार करने का सबसे बड़ा मकसद है कैदियों की रिहैबिलिटेशन करना है। इस साइट को बनाने का मकसद है कि लोग अकसर सोचते हैंै कि लोग जेल में जाकर बड़े मुजरिम बन जाते हैं, लेकिन इस साइट में जेल के अंदर होने वाली एक्टिविटी दिखाई जाएगी। इससे लोगों की सोच बदलेगी कि अंदर जो कैदी हैंै वह अच्छे से बाहर भी अपना जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

 

2000 से ज्यादा के ऑर्डर पर डिलिवरी फ्री

 

यदि आपका खाने का ऑर्डर 2 हजार रुपए से ज्यादा है तो उसकी डिलिवरी चार्जेज फ्री होंगे। यदि उससे कम है तो आपको 100 रुपए डिलिवरी चार्जेज देने पड़ेंगे। इसके अलावा यदि आप फर्नीचर की आइटम पांच हजार रुपए से ज्यादा की मंगवाते हैं तो आपको फ्री डिलिवरी होगी जबकि कम मंगवाते हैंै तो आपको 500 रुपए डिलिवरी चार्जेज देने होंगे।

 

लोगों के मन में बपी कैदियों के प्रति गलत भावना को बदलेगी

जेल प्रशासन की मानें तो यदि इस साइट का अच्छा रिस्पॉन्स आता है तो वह इसका दायरा आगे तक बढ़ाएंगे। वहीं इस साइट के बनाने के पीछे जेल प्रशासन का मुख्य मकसद लोगों तक कैदियों के प्रति बुरा रवैया खत्म करना है ताकि सजा काटने के बाद कैदी समाज में अच्छे से अपना जीवन जी सकें। लोगों के मन में जो कैदियों के प्रति गलत भावना बनी हुई है कि वह सुधर नहीं सकते, उसे बदला जा सके। 

 
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