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फूड सीरीज-3 : कीटो डाइट क्या है, क्यों और कैसे फायदा पहुंचाती है, कौन से सेलेब इसे फॉलो करते हैं?

करण जौहर, हुमा कुरैशी, तन्मय भट्ट और अमेरिकन रिएल्टी टीवी स्टार किम कर्दाशियां जैसे कई सेलि​ब्रेटी कीटो डाइट लेते हैं।

Danik Bhaskar | Jun 30, 2018, 03:43 PM IST
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हेल्थ डेस्क. इन दिनों कीटो डाइट काफी लोग फॉलो कर रहे हैं। इसे कीटोजेनिक डाइट भी कहते हैं। फिल्ममेकर करण जौहर, एक्ट्रेस हुमा कुरैशी, कॉमेडियन तन्मय भट्ट और अमेरिकन रिएल्टी टीवी स्टार किम कर्दाशियां जैसे कई सेलि​ब्रेटी कीटो डाइट लेते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि इसमें फैट का एक बड़ा हिस्सा शामिल होता है इसलिए वजन बढ़ सकता है जबकि ऐसा नहीं है। अगर इसे एक्सपर्ट के मुताबिक प्लान किया जाए तो वजन कंट्रोल होता है साथ ही बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल भी कम होता है। न्यूट्रिशनिस्ट सुरभि पारीक से जानते हैं कीटो डाइट कब, क्यों और कैसे फॉलो की जाए...

सवाल: क्या है कीटो या कीटोजेनिक डाइट?
जवाब:
कीटोजेनिक डाइट फैट, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का कॉम्बिनेशन है। इसमें 65-70 फीसदी फैट, 20-25 प्रतिशत प्रोटीन और 5 फीसदी कार्बोहाइड्रेट शामिल होता है। इसे शरीर की जरूरत, लंबाई और वजन के अनुसार प्लान किया जाता है। कभी भी खुद से यह डाइट प्लान न करें क्योंकि आहार विशेषज्ञ इसे प्लान करते समय कई फैक्टर ध्यान में रखते हैं।

सवाल: यह डाइट कैसे काम करती है?
जवाब:
ज्यादातर डाइट प्लान में एनर्जी के लिए कार्बोहाइड्रेट ही सोर्स होता है लेकिन कीटो डाइट में फैट ही एनर्जी देने का काम करता है। ऐसी स्थिति में जब व्यक्ति को एनर्जी की जरूरत होती है तो कार्बोहाइड्रेट न होने पर फैट काम आता है। इस तरह जिनका वजन ज्यादा है उनमें एनर्जी की जरूरत होने पर शरीर जमा अतिरिक्त फैट का इस्तेमाल करता है जिससे वजन कम होता है।

सवाल: किन लोगों के लिए जरूरी है कीटो डाइट?
जवाब:
यह खासकर उन लोगों के लिए जरूरी है जिन्हें दौरे पड़ते हैं यानी मिर्गी के मरीज हैं। इसके अलावा जो वजन को कंट्रोल करना चाहते हैं वे इसे एक्सपर्ट की सलाह से फॉलो कर सकते हैं। आमतौर पर डाइट में कार्बोहाइड्रेट अधिक लिया जाता है इसमें मौजूद ग्लूकोज दौरों की गतिविधि को बढ़ा देता है इसलिए इस डाइट की मदद से कार्ब कम और फैट को बढ़ाकर मिर्गी के रोगियों का इलाज किया जाता है।

सवाल : कैसे हुई कीटोजेनिक डाइट की शुरूआत?
जवाब:
इसकी शुरुआत 1920 में मिर्गी के दौरों को कंट्रोल करने करने के लिए वैकल्पिक डाइट के तौर पर हुई थी। बाद इसे मस्तिष्क से जुड़े दूसरे रोगों जैसे आॅटिज्म, पार्किंसंस ​डिजीज, अल्जाइमर, ग्लियोमा और कैंसर के इलाज में प्रयोग किया और सकारात्मक परिणाम देखे गए।

सवाल: इस डाइट के फायदे क्या हैं?
जवाब:
बच्चों में मिर्गी के दौरों को कंट्रोल करने के अलावा ये अनिद्रा की समस्या दूर करती है साथ ही मेंटल डिसआॅर्डर से दूर रखती है। चूंकि ये डाइट भूख को कंट्रोल करती है इसलिए ऐसे लोग जो वजन घटाना चाहते हैं वे इसे फॉलो कर सकते हैं। इसमें फैट की अच्छी मात्रा होने के कारण स्किन स्मूद और चमकदार रहती है।