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विश्व कपः एक ब्लूप्रिंट, 3 प्रोजेक्ट और डायरेक्टर की 18 साल की मेहनत से तैयार हुई बेल्जियम की गोल्डन जेनरेशन

बेल्जियम 5 बार की चैंपियन ब्राजील को हराकर 32 साल बाद सेमीफाइनल में पहुंचा है। अब 10 जुलाई को उसका मैच फ्रांस से होगा।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 09, 2018, 02:30 PM IST

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    रूस में देदोवस्क में ट्रेनिंग कैम्प में अभ्यास करते बेल्जियम के खिलाड़ी।
    • यूरो कप-2000 से बाहर होने के बाद बेल्जियम के गेम चेंज का दौर शुरू हुआ
    • टेक्निकल डायरेक्टर माइकल सेबलोन ने 100 से ज्यादा प्रजेंटेशन दिए, 3 प्रोजेक्ट शुरू किए


    मॉस्को.बेल्जियम की टीम फुटबॉल विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है। वह 5 बार के चैम्पियन ब्राजील को हराकर 32 साल बाद टीम आखिरी-4 में पहुंची है। इस टीम को बेल्जियम की गोल्डन जेनरेशन कहा जा रहा है। यूरो कप-2000 में बेल्जियम ग्रुप स्टेज से बाहर हो गई थी। उसके बाद से ही टीम के कायापलट का जिम्मा पूर्व फुटबॉलर माइकल सेबलोन को सौंपा गया। उन्हें टेक्निकल डायरेक्टर बनाया गया। सेबलोन ने टीम की सफलता का ब्लूप्रिंट तैयार किया। उन्होंने 3 अनोखे प्रोजेक्ट शुरू किए, जिसका नतीजा सामने है।

    प्रोजेक्ट-2000: यूनिवर्सिटी रिसर्चर की मदद से 1500 मैचों की स्टडी कराई

    लोउवेन यूनिवर्सिटी को बेल्जियम के यूथ फुटबॉल की स्टडी करने को कहा गया। यूनिवर्सिटी की ओर से वेर्नर हेल्सन ने रिपोर्ट तैयार की। वे खुद एक फुटबॉलर और कोच रह चुके थे। उनकी अगुआई में यूनिवर्सिटी की टीम ने अलग-अलग आयु वर्ग में हुए 1500 मैचों का अध्ययन किया गया। कहां कौन सी कमी है, इसे सूचीबद्ध किया गया। निम्न दो कमजोरियों को खास तौर पर रेखांकित किया गया।
    1)अंडर-8 और अंडर-9 आयु वर्ग के मुकाबलों में 80% खिलाड़ी आधे घंटे में औसतन 2 बार ही गेंद को टच करते थे।
    2)जीत पर बहुत ज्यादा फोकस था। एक खिलाड़ी के तौर पर डेवलपमेंट पर किसी का ध्यान नहीं था।

    प्लेइंग सिस्टम में बदलाव

    बेल्जियम पहले 4-4-2 या कभी-कभी 3-5-2 के फॉर्मेशन से खेलता था। वह फॉर्मेशन काफी डिफेंसिव स्ट्रैटजी कहलाती है, जो काउंटर अटैक पर गोल करने पर विश्वास करती है। सेबलॉन के सहयोगी और बेल्जियम की जूनियर टीम को कोचिंग दे चुके बॉब ने 4-3-3 फॉर्मेशन का प्रस्ताव दिया। सभी यूथ टीम को इस फॉर्मेशन की सलाह दी गई। ड्रिबलिंग डेवलप करने के लिए 2-2, 3-3, 5-5, 8-8 खिलाड़ियों के आपस में मैच कराए गए। जूनियर टीमों की रैंकिंग खत्म की गई। सेबलोन ने बदलाव लागू कराने के लिए क्लबों और कोचों को 100 से ज्यादा प्रजेंटेशन दिए।

    ट्रेनिंग सिस्टम में बदलाव
    यूरो कप-2000 की मेजबानी से हुई आमदनी का बड़ा हिस्सा फुटबॉल पर खर्च किया गया। ब्रसेल्स के बाहरी हिस्से टुबीज में नया नेशनल फुटबॉल सेंटर बनवाया गया। एंट्री लेवल कोचिंग कोर्स में एडमिशन फ्री किया। इससे कोच की संख्या 10 गुना बढ़ गई।

    पर्पल टैलेंट प्रोजेक्ट:जैसे ही कोई पढ़ाई में कमजोर पड़ा, उसे स्टडी ब्रेक दिया।अगर खिलाड़ी का स्कूल ग्रेड कम हुआ तो उसे ब्रेक देकर पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा। रोमेलु लुकाकू इसी प्रोजेक्ट से निकले। सेबलोन कहते हैं कि 10% कैडेट ही प्रोफेशनल खिलाड़ी बन पाते हैं। बाकी 90% को भटकने के लिए नहीं छोड़ सकते।
    डबल पास:हर एकेडमी को स्कोर दिया गया। जितना ज्यादा स्कोर, उतना ज्यादा फंड। यह फुटबॉल एकेडमी का ऑडिट सिस्टम है। देश की एकेडमियों को 8 अलग-अलग पैमानों पर परख कर स्कोर दिया जाता है। जिसका जितना ज्यादा स्कोर, उसे खेल के लिए नेशनल फेडरेशन से उतनी ज्यादा फंडिंग।

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    देदोवस्क में अभ्यास सत्र के दौरान बेल्जियम टीम के कोच रॉबर्टो मार्टिनेज और खिलाड़ी एडन हजार्ड।
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    रूस में देदोवस्क में ट्रेनिंग कैम्प में सोमवार को बेल्जियम के खिलाड़ियों ने कड़ा अभ्यास किया।
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