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डाउनलोड करेंजयपुर. किले-महलों के लिए पहचान रखने वाला जयपुर अब वाइल्ड लाइफ टूरिज्म स्पॉट के रूप में पहचाना जाने लगा है। टूरिस्ट और कुछ वाइल्ड लाइफ रिसर्चर ने झालाना में डेढ़ साल पहले तक 25-30 पैंथर होने की बात कही थी। वन विभाग भी यही बताता है। कुछ समय में इनमें से कुछ के हताहत होने और गायब होने के मामले भी सामने आए हैं। शिकारियों के फंदे जैसी घटनाओं से किसी अनहोनी की आशंका बलवती होती है। भास्कर भी टूरिज्म के बजाए पैंथर संरक्षण और रिसर्च की बात कहता रहा है। वन विभाग भी काफी समय से कैमरा ट्रैप की बात कहता रहा लेकिन काम धरातल पर नहीं आ रहा था।
15 कैमरे मंगाए, स्टाफ को ट्रेनिंग
वन विभाग ने पहली बार पैंथर के लिए ‘कैमरा ट्रैप’ की तैयारी कर ली है। झालाना में सोमवार से शुरुआत होगी। संबंधित अफसरों ने 15 कैमरे मंगाए हैं। करीब 30 दिन तक अलग-अलग जगह कैमरा ट्रैप किया जाएगा। पहले झालाना, खो-नागोरियान ब्लॉक के 19 वर्गकिमी में फिर आमागढ़, गलता सहित पूरे 32 वर्गकिमी जंगल में पैंथरों का मूवमेंट रिकॉर्ड होगा। इसके लिए स्टाफ को बेसिक ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके बाद छोटे-छोटे ब्लॉक में कैमरे लगाए जाएंगे।
पैंथर संरक्षण के लिए भोजन-पानी के इंतजामों पर मेहनत
झालाना में सिविल के कार्यों पर पैसा तो खूब खर्च हो रहा है, लेकिन पैंथर के भोजन-पानी की व्यवस्था के प्रयास नाकाफी हैं। वनमंत्री के लगातार दखल पर पानी के इंतजाम हुए हैं, लेकिन जो पोंड बनाए हैं, वो रीते हैं। दूसरी ओर उनके कई बार कहने के बावजूद जो अफसर दीवार बनाने में अतिरिक्त दिलचस्पी दिखा रहे थे, वे उनको कैद कर उनके लिए प्रेबेस लाने में फेल रहे हैं। वहीं दीवार के काम के घटिया होने के बावजूद वन विभाग आंखें मूंदे है।
पैंथर प्रोजेक्ट की गंभीरता देखते हुए पहली बार कैमरा ट्रैप किया जाएगा। स्टाफ को ट्रेनिंग देकर 15 कैमरों की व्यवस्था की है। इसमें महीना भर लगेगा।
-सुदर्शन शर्मा, डीएफओ
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