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फोर्टिस हेल्थकेयर को खरीदने के लिए 3 जुलाई तक प्रस्ताव दे सकेंगे निवेशक, दूसरी बार बढ़ाई समयसीमा

फोर्टिस बोर्ड ने मुंजाल-बर्मन समेत चार दावेदार पहले ही शॉर्टलिस्ट कर लिए हैं।

Danik Bhaskar | Jun 29, 2018, 02:19 PM IST
नई दिल्ली. फोर्टिस हेल्थकेयर ने अपना कारोबार बेचने के लिए निवेश प्रस्ताव दाखिल करने की समयसीमा 3 जुलाई तक बढ़ा दी है। नए सिरे से बोली की प्रक्रिया शुरू करने के बाद कंपनी ने दूसरी बार डेडलाइन बढ़ाई है। इससे पहले समयसीमा 14 जून से बढ़ाकर 28 जून की गई थी। अभी तक चार दावेदार फोर्टिस को खरीदने की रेस में हैं जिनमें मुंजाल-बर्मन, मनिपाल-टीपीजी कंसोर्टियम, मलेशिया की आईएचएच हेल्थकेयर बेरहाड और रेडिएंट लाइफ केयर शामिल हैं। इस चारों को फोर्टिस ने नए सिरे से बोली प्रक्रिया शुरू करते वक्त ही शॉर्टलिस्ट कर लिया था। ये पहले भी दौड़ में शामिल थे लेकिन 10 मई की बोर्ड बैठक में उस वक्त के फोर्टिस मैनेजमेंट ने मुंजाल-बर्मन के प्रस्ताव को चुना था। इसके बाद बोर्ड में बदलाव हो गया। जिसकी वजह से आपसी सहमति से मुंजाल-बर्मन के प्रस्ताव को रद्द कर नए सिरे से बोली प्रक्रिया शुरू की गई।
निवेश के लिए नई शर्तें: फोर्टिस बोर्ड की नई शर्तों के मुताबिक निवेशकों को प्रेफरेंशियल शेयर अलॉटमेंट के जरिए कम से कम 1,500 करोड़ रुपए का निवेश करना होगा। आरएचटी हेल्थकेयर ट्रस्ट के अधिग्रहण के लिए फंडिंग की योजना बतानी पड़ेगी। फोर्टिस की डायग्नोस्टिक फर्म एसआरएल से निजी इक्विटी निवेशकों को निकलने का मौका देने का प्लान देना होगा। निवेशक कोई शर्त नहीं रख सकेंगे साथ ही फंडिंग के सोर्स की जानकारी देनी पड़ेगी।
फोर्टिस बोर्ड में बदलाव: 10 मई को मुंजाल-बर्मन के प्रस्ताव पर सहमति जताने वाले 4 डायरेक्टर बोर्ड से बाहर हो चुके हैं। हरपाल सिंह, सबीना वैसोहा, और तेजिंदर सिंह गिल ने 22 मई की ईजीएम से पहले खुद ही इस्तीफा दे दिया था। ब्रायन टेम्पेस्ट को शेयरधारकों ने वोटिंग के जरिए बाहर कर दिया। इन चारों पर शेयरधारकों के हितों में काम नहीं करने के आरोप लगे थे। सुवालक्ष्मी चक्रबर्ती, रवि राजगोपाल और इंद्रजीत बनर्जी स्वतंत्र निदेशक के तौर पर कंपनी बोर्ड में शामिल हुए हैं। 27 जून को रोहित भसीन ने भी निजी वजह बताते हुए स्वतंत्र निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया।
फोर्टिस को 914 करोड़ का तिमाही घाटा: जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनी को 914.32 करोड़ का घाटा हुआ है। पिछले वित्त वर्ष (2016-17) की इसी तिमाही में सिर्फ 37.52 करोड़ का घाटा रहा था। चौथी तिमाही में कंसोलिडेटेड इनकम 1,086.38 करोड़ रुपए रही है जो पिछले साल की तिमाही में 1,123.43 करोड़ थी। पूरे वित्त वर्ष में कंपनी को 934.42 करोड़ का नुकसान हुआ। पिछले वित्त वर्ष में ये 479.29 करोड़ रुपए था। फोर्टिस के मैनेजमेंट का कहना है कि कंपनी लगातार कारोबारी चुनौतियों का सामना कर रही है।