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डाउनलोड करेंग्वालियर. रमजान का पाक महीना शुरू होने से पहले दरगाह अजमेर शरीफ पर गया गुजरात का एक परिवार हादसे का शिकार हो गया। अजमेर से लौटते समय पनिहार के पास हाईवे पर तेज रफ्तार महिन्द्रा टीयूवी पलट गई, जिससे उसमें सवार एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। मरने वालों में तीन महिलाओं सहित 5 माह का मासूम बच्चा शामिल है। गाड़ी हाईवे पर करीब 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से जा रही थी, तभी सामने अचानक गाय-भैंस का झुंड आ गया। मवेशियों काे बचाने के लिए गाड़ी चला रहे युवक ने जैसे ही स्टेयरिंग मोड़ी, गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खंती में गिरी और तीन बार पलट गई।
अजमेर शरीफ से लौट रहा था गुजरात का परिवार
गुजरात के वापी के रहने वाले रमजान खान अपने परिवार के साथ 12 मई को अपनी महिन्द्रा टीयूवी जीजे 15 सीएच 1268 से निकले थे। दरगाह अजमेर शरीफ होते हुए यह लोग जयपुर पहुंचे। जयपुर से गुरुवार सुबह आगरा पहुंचे। आगरा घूमने के बाद शाम को वापी के लिए रवाना हुए। रमजान ही गाड़ी चला रहे थे। रात करीब 8 बजे यह लोग पनिहार के पास हाईवे से गुजर रहे थे। रायपुरा पुलिया पर जैसे ही पहुंचे तो अचानक सामने मवेशियों का झुंड आ गया। मवेशियों से बचने के लिए रमजान ने लेफ्ट टर्न लिया। गाड़ी अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे खंती में जाकर तीन बार पलट गई। हादसा इतना भीषण था कि गाड़ी के गेट खुल गए और कांच फूट गए।
गाड़ी के गेट खुलने की वजह से उसमें सवार रमजान की मां जेहरुनिशा, भाभी सफीना पत्नी कलीम खां, भतीजा अजमान पुत्र कलीम खान और बहन सबीना पत्नी जावेद खान की मौत हो गई। बाकी लोगों को भी चोटें लगीं। राहगीर इन लोगों को जेएएच लेकर आए। जेएएच में इन लोगों ने शवों के पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। रात में ही यह लोग शव और घायलों को लेकर वापी के लिए रवाना हो गए।
यह लोग थे सवार: रमजान खान गाड़ी चला रहे थे। उनके साथ गाड़ी में जेरुनिशा, सबीना, सफीना, रेशमा, रोशनी, तारीक, कादिर, सुल्तान, लकी, आविद, कलीम खान, अजमान खान और जावेद खान सवार थे।
एक घंटे तक नहीं आई एंबुलेंस, समय पर आती तो बच सकती थी मां की जान
मैं गाड़ी ड्राइव कर रहा था। गाड़ी पुलिया के पास पहुंची ही थी कि अचानक सामने मवेशियों का झुंड आ गया। मेरी गाड़ी 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से थी। जैसे ही लेफ्ट टर्न मारा गाड़ी तीन बार पलटी और सीधी हो गई। कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। कुछ देर बाद आंख खुली तो मैं स्टेयरिंग और सीट के बीच में फंसा था। मेरा भतीजा लहूलुहान पड़ा था। पीछे से आ रहे लोगों ने हमें बाहर निकाला। कुछ देर बाद पुलिस आ गई, लेकिन एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई। मेरी मां तड़प रही थीं। आंखों के सामने उन्होंने दम तोड़ दिया। जब एंबुलेंस नहीं आई तो एक राहगीर ही अपनी गाड़ी से लेकर भागा। लेकिन उससे पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। मेरी आंखों के सामने परिवार की खुशियां छिन गईं। - जैसा की रमजान खान ने दैनिक भास्कर को बताया।
मेरी आंखों से सामने हुई पत्नी, बेटे और मां की मौत
मेरी पत्नी बेटे को लेकर बैठी थी। उसके बगल में मां बैठी थीं। गाड़ी जैसे ही मोड़ी तो गाड़ी पलटती चली गई। काफी देर तक कुछ समझ नहीं आया। आंखों के सामने अंधेरा छा रहा था। राहगीरों ने मदद की तो देखा पत्नी और बेटे की मौत हो गई थी। मां की सांस उखड़ रही थी। कुछ देर में उसने भी दम तोड़ दिया। - जैसा की कलीम खां ने दैनिक भास्कर को बताया।
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