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फ्रांस ने हर मैच 90 मिनट में जीता: स्पीड पर फोकस, तीन स्टार खिलाड़ियों की जगह चार नए चेहरों को मौका दिया

Dainik Bhaskar

Jul 15, 2018, 09:54 PM IST

फ्रांस ने विश्वकप के फाइनल में क्रोएशिया को मात दी।

France won every match in 90 minutes in this fifa world cup

- फ्रांस के कोच डैसचैम्प्स बतौर खिलाड़ी 1998 की वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा थे, अब कोच

खेल डेस्क. क्रोएशिया को 4-2 से हराकर फ्रांस ने दूसरी बार फुटबॉल वर्ल्ड कप जीत लिया। पूरे टूर्नामेंट में फ्रांस की रणनीति पहला गोल करके विपक्षी पर दवाब बनाने और रफ्तार बरकरार रखने की थी। टीम के मुख्य स्ट्राइकर किलिएन एम्बाप्पे-एंटोनी ग्रीजमैन ने आक्रमण को रफ्तार दी। एम्बाप्पे-ग्रीजमैन की जोड़ी ने पूरे टूर्नामेंट में 8 गोल किए, जो स्टार फुटबॉलर नेमार-रोनाल्डो-मेसी के कुल गोल से 1 ज्यादा है। एम्बाप्पे 37 किलोमीटर/घंटे तक की रफ्तार से दौड़े। उन्होंने 34 किलोमीटर/घंटे की स्पीड से दौड़ने वाले क्रिस्टियानो रोनाल्डो को भी पछाड़ दिया। फ्रांस ने इस वर्ल्ड कप में हर मुकाबला 90 मिनट में ही जीता। कोच डैसचैम्प्स ने वर्ल्ड कप टीम में तीन सितारा खिलाड़ियों करीम, मार्सियल और पायेट को शामिल नहीं किया। इनकी जगह कान्टे, एम्बाप्पे, पवार्ड और हर्नांडेज जैसे युवा खिलाड़ियों को मौका दिया।

1) पहले लीड ली, फिर बढ़त को डिफेंड किया: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले ग्रुप मैच में एंटोनी ग्रीजमैन ने पहला गोल किया। फ्रांस ने ये मैच 2-1 से जीता। इसके बाद पेरू के खिलाफ एम्बाप्पे ने एक गोल कर जीत दिलाई। डेनमार्क के खिलाफ आखिरी ग्रुप मैच 0-0 के स्कोर पर ड्रॉ रहा। नॉकआउट दौर में प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबला अर्जेंटीना के खिलाफ हुआ। फ्रांस ने इसमें भी पहला गोल 13वें मिनट में कर दिया। मुकाबला 4-3 से जीता। क्वार्टर फाइनल में उरुग्वे को 2-0 और सेमीफाइनल में बेल्जियम को 1-0 से हराया। फाइनल में क्रोएशिया के खिलाफ भी पहला गोल फ्रांस ने किया और मुकाबला 4-2 से जीता।

2) हर मुकाबला 90 मिनट में जीता, एम्बाप्पे बने मिस्टर 37 : फ्रांस की टीम ने हर मुकाबला 90 मिनट में जीता, एक्स्ट्रा टाइम में मैच नहीं जाने दिया। इसके पीछे रफ्तार फ्रांस का सबसे मजबूत पक्ष रही। पहला गोल दागना और दबाव बढ़ाने के लिए रफ्तार से लगातार आक्रमण करते रहना ही टीम के खिताब जीतने की अहम वजह रही। कुल चार गोल करने वाले 19 साल के किलियन एम्बाप्पे को यंग प्लेयर अवॉर्ड मिला। रफ्तार उनकी मजबूती रही। अर्जेंटीना के खिलाफ लगातार दो गोल करके वे सुर्खियों में आए। फाइनल में भी उन्होंने एक गोल किया। एम्बाप्पे सेमीफाइनल मैच में 37 किलोमीटर/घंटे की रफ्तार से दौड़े थे। इसके बाद टीम उन्हें मिस्टर 37 कहने लगी। पुर्तगाल के रोनाल्डो वर्ल्डकप में 34 और क्रोएशिया के आंटे रेबिच 34 किलोमीटर/घंटे की रफ्तार से दौड़े।

3) कोच का फ्रेंच रिवॉल्यूशन, स्टार खिलाड़ियों की जगह नए चेहरों को मौका : फ्रांस के कोच डिडिएर डैसचैम्प्स ने जब वर्ल्ड कप टीम चुनी, तो उसमें यूरो 2016 का फाइनल खेलने वाली टीम के 14 खिलाड़ी बाहर थे। विवाद हुआ तो कोच ने कहा कि यह फैसला फ्रेंच फुटबॉल में रिवॉल्यूशन लाएगा। डेसचैम्प्स ने करीम बेंजिमा, एंथोनी मार्सियल, दिमित्री पायेट जैसे सितारों को टीम में जगह नहीं दी। इनकी जगह कान्टे, एम्बाप्पे, पवार्ड और हर्नांडेज को बुलाया। मकसद युवा और तेज खिलाड़ियों की टीम तैयार करना था, जो रणनीति को मैच में साकार कर सकें। टीम ने इसे साबित भी किया। डैसचैम्प्स फ्रांस की 1998 वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा थे। इस बार वे कोच की भूमिका में थे।

4) पूरे टूर्नामेंट पारंपरिक फॉर्मेशन, फाइनल में प्रयोग: फ्रांस के डैसचैम्प्स प्रयोग करने वालों में शुमार हैं, लेकिन वे केवल दो पारंपरिक फॉर्मेशन तक सीमित रहे। 4-3-3 यानी 4 डिफेंडर, 3 मिडफील्डर और 3 स्ट्राइकर। और 4-4-2 यानी 4 डिफेंडर, 4 मिडफील्डर और 2 स्ट्राइकर। पूरे टूर्नामेंट में इन्हीं दो फॉर्मेशन पर टीम को खिलाने वाले डैसचैम्प्स ने फाइनल में पहला प्रयोग किया और क्रोएशियाई टीम की फॉर्मेशन को ही अपना लिया। फ्रांस ने 4-2-3-1 की फॉर्मेशन रखी। यानी 4 डिफेंडर, 2 डिफेंसिव मिडफील्डर, 3 अटैकिंग मिडफील्डर और 1 स्ट्राइकर। टीम ने 4 गोल दागे, जिसने फाॅर्मेशन को सही साबित किया।

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