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55 रु. की किताब के अमेजन ने वसूले 370 रु, आनन-फानन में यूटर्न-लौटाने पड़े रु

3 वर्ष पहले
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गुना  (मप्र).  राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की प्रकाशित किताबों की ऑनलाइन बिक्री में भारी धांधली का मामला सामने आया है। ऐसी किताबें जो बाजार में कहीं उपलब्ध नहीं है, उन्हें 3 से 15 गुना ज्यादा कीमत पर ऑनलाइन बेचा जा रहा है। जबकि परिषद की प्रकाशित किताबों को प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर बेचा ही नहीं जा सकता है। 


मामला कक्षा 8 की एनसीईआरटी की गणित की किताब का है, जिसका प्रिंट रेट 55 रुपए है। सब इंस्पेक्टर अरुण तोमर ने यह किताब अमेजन डॉट कॉम से ऑनलाइन मंगाई थी, जो उन्हें 370 रुपए की पड़ी। इसमें किताब की कीमत 275 रुपए थी और डिलेवरी चार्ज 95 रुपए लिया गया। तोमर ने बताया कि यह किताब कहीं नहीं मिल रही थी। पुस्तक विक्रेताओं का भी कहना था कि 8वीं ही नहीं बल्कि 6 व 7वीं के गणित की किताब भी पूरे मप्र में कहीं भी उपलब्ध नहीं है। इसलिए उन्होंने अमेजन पर सर्च किया तो उसमें उन्हें यह किताब मिल गई। वेबसाइट पर तीन विक्रेताओं के ऑप्शन दिए गए थे और यह किताब 275 से 990 रुपए तक की कीमत पर उपलब्ध थी। 

 

 

दूसरी किताब पर प्रिंट रेट देखा तो पकड़ में आई पूरी गड़बड़ी 

 

तोमर का कहना था कि उन्हें किताब की सही कीमत नहीं पता थी, इसलिए उन्होंने 275 रुपए में उसे बुक कर दिया और दो-तीन में डिलेवरी भी हो गई। बाद में उन्होंने अपनी बेटी की सहेली के पास जब यह किताब देखी तो उस पर 55 रुपए प्रिंट थे। ऐसा भी नहीं था कि यह किताब पुरानी हो, उसे इसी साल खरीदा गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी की किताब देखी तो पता चला कि उस पर 275 रुपए कीमत का स्टीकर चिपका हुआ है। उन्होंने स्टीकर उखाड़ा तो नीचे सही प्रिंट रेट को काले पेन से मिटा दिया गया था। 

 

माफी मांगी, रुपए लौटाए और कार्रवाई का दिया भरोसा

 

इस मुद्दे को लेकर श्री तोमर ने अमेजन डॉट कॉम पर संपर्क किया तो कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा उनसे माफी मांगी गई और अतिरिक्त राशि गिफ्ट कार्ड के रूप में वापस लौटाई गई। यही नहीं कंपनी की ओर से यह वादा किया गया कि अधिक कीमत वसूलने वाले विक्रेताओं पर वह कार्रवाई भी कराएगी। वहीं इस घटना का असर यह हुआ कि शुक्रवार को कंपनी के एप पर एनसीईआरटी की किताबों की कीमतों में सुधार देखा गया। 

 

बड़ा सवाल - जो किताब कहीं नहीं मिल रही, वह डीलरों के पास कैसे पहुंची

 

स्थानीय पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि उन्होंने कक्षा 6 से 8वीं तक की गणित की किताब को लेकर एनसीईआरटी के तमाम डिपो पर संपर्क किया। एक पुस्तक विक्रेता रमेश जैन ने बताया कि कई दिनों से लगातार उन्हें यह जवाब मिल रहा है कि यह उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि यह किताब कुछ खास डीलरों के पास कैसे पहुंच गई? जबकि इसकी बिक्री व सप्लाई का जिम्मा एक सरकारी एजेंसी के पास है। उन्होंने कहा कि यह मामला मिलीभगत का लग रहा है। 

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