फ्रेंडशिप डे विशेष: बचपना दिखाएं लेकिन बचकानी हरकतों से बचें, ऐसे ताउम्र बरकरार रहेगी दोस्ती / फ्रेंडशिप डे विशेष: बचपना दिखाएं लेकिन बचकानी हरकतों से बचें, ऐसे ताउम्र बरकरार रहेगी दोस्ती

दोस्ती में अपेक्षाएं होना सामान्य है लेकिन कई बार अधिक अपेक्षाओं के कारण रिश्तों की पुरानी रंगत फीकी पड़ने लगती है।

Dainikbhaskar.com

Aug 03, 2018, 07:04 PM IST
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लाइफस्टाइल डेस्क. शर्मिष्ठा को कॉलेज के दिनों से ही लीडर बनना पसंद था और इसका प्रभाव उसके ग्रुप पर भी नज़र आता था। अपनी बातें मनवाना, अपने अनुसार चीज़ें करवाना पसंद करती थी। कॉलेज ख़त्म होने के बाद जब सभी दोस्त अलग-अलग शहरों में काम करने लगे। तब भी उसका रवैया बरकरार था और इस प्रकार पुरानी दोस्ती में दरार आने लगी। दोस्ती में अपेक्षाएं होना सामान्य है लेकिन कई बार अधिक अपेक्षाओं के कारण रिश्तों की पुरानी रंगत फीकी पड़ने लगती है। इसे बरकरार रखना बेहद ज़रूरी है। चंद्रकांत पाणेरी से जानते हैं दोस्ती के रिश्ते को और मज़बूत कैसे बनाएं...

बदलती हैं प्राथमिकताएं
ऐसा ज़रूरी नहीं है कि व्यक्ति हर समय आपके लिए उपलब्ध हो। सभी कि अपनी व्यस्तताएं होती हैं। दोस्त ज़्यादा व्यस्त है तो इसका मतलब ये नहीं कि वो जानबूझकर ऐसा कर रहा है। समय के साथ सभी की प्राथमिकताएं बदलती हैं। कभी काम तो कभी घर की ज़िम्मेदारियां। ऐसे में जब आप बुलाएं तब वह वहां मौजूद हो ऐसा ज़रूरी नहीं होता। आप फोन लगाएं और यदि वे व्यस्त हैं तो समझदारी दिखाते हुए बाद में बात करने के लिए कहें। ऐसे में समय मिलने पर वह ज़रूर आपसे बात करेंगे।

बदलाव को सहर्ष स्वीकारें
कई बार जिस वातावरण में दोस्त काम कर रहा है, वह उससे बिलकुल विपरीत हो जिसमें कुछ साल पहले वह आपके साथ रहता था। नौकरी के बाद ज़िंदगी में बदलाव होना स्वाभाविक है। बदलाव पर नाराज़गी जाहिर करने की बजाय उसे ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकारें।

ख़ुद पहल करें
अगर आपके दोस्त आपसे सम्पर्क नहीं कर पा रहे हैं तो आप उनसे बात करें। दोस्ती में कोई भी छोटा-बड़ा नहीं होता। इसलिए अहंकार को बीच में लाने की बजाय समय-समय पर आप दोस्त की ख़ैरियत पूछते रहें। फिर देखिएगा कैसे आपके दोस्त समय की कमी होने पर भी आपके लिए समय निकालेंगे।

शिकायतों का पिटारा न बिखेरें
कई बार हम दोस्तों से मिलते ही शिकायतें करने लगते हैं। उदाहरण के लिए- कहां था/थी, तुम्हें तो समय ही नहीं है, बड़े आदमी हो गए हो। ऐसा करने से दोस्त खीझ सकते हैं और उनकी विचारधारा में परिवर्तन लाने के लिए समय, परिस्थितियां ज़िम्मेदार नहीं होंगी, बल्कि पूरी तरह से आप ही ज़िम्मेदार होंगे। इसलिए बात को शिकायत की तरह नहीं बल्कि प्यार से ज़ाहिर करें।

संतुलन बनाए रखें
जिस प्रकार दोस्ती उम्र बढ़ने पर और भी गहरी होती जाती है। ठीक उसी प्रकार आपकी भी उम्र बढ़ती है तो क़ायदे से समझदारी भी बढ़नी चाहिए। अगर आप अभी भी सोचते हैं कि आप वो सभी हरकतें जो बचपन में या कुछ साल पहले किया करते थे उन्हें अब भी दोहराएंगे तो यह आपकी नासमझी है। दोस्तों के सामने बचपना कायम रखें लेकिन बचकानी हरकतें न करें। हां बचपने से आप उस पहले वाली दोस्ती में ताज़गी भर सकते हैं।

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