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फुरकान व मंजूर थे दाैड़ में अागे, प्रभारी की नजर में बेहतर निकले शहजादा

एक वर्ष पहले
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शहजादा अनवर ने राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की अाेर से टिकट पर कब्जा कर सबकाे चाैंका दिया। पार्टी के लाेगाें के लिए यह नया नाम नहीं था, लेकिन राज्यसभा चुनाव की चर्चा के शुरुअाती दिनाें में टिकट के लिए उनका नाम नहीं था। जब राज्यसभा चुनाव की चर्चा शुरू हुई तब फुरकान अंसारी का नाम उठाया गया। बाद में रांची के मंजूर अहमद अंसारी अाैर बाेकाराे के मंजूर अहमद अंसारी के नाम की भी चर्चा होने लगी। अंत में शहजादा अनवर का नाम भी जुड़ा अाैर वे सबसे अागे निकल गए। कहा जा रहा है कि फुरकान अंसारी का नाम इस बात पर निगेटिव होने लगा कि लाेकसभा चुनाव के पहले अौर बाद में उनके पुत्र जामताड़ा विधायक डॉ. इरफान अंसारी लगातार अालाकमान के विरोध में बयान देते रहे हैं। बयानाें की वजह से प्रदेश कांग्रेस प्रभारी की नजर में उनका पाेजिशन ठीक नहीं था। प्रभारी की नाराजगी इनके प्रति बढ़ती चली गई। इसका परिणाम यह निकला की राज्यसभा चुनाव काे लेकर प्रदेश प्रभारी ने फुरकान अंसारी के नाम पर आगे विचार ही नहीं किया। रांची के मंजूर अहमद अंसारी अाैर बाेकाराे के मंजूर अहमद अंसारी के नामों पर अागे विचार किए बिना ही केवल शहजादा अनवर का नाम बढ़ा अौर उस पर मुहर लग गई।

{जीत के लिए प्रमुख विपक्षी दल में लगानी होगी सेंध

कांग्रेस की जीत की राह नहीं दिख रही अासान

नंबर गेम में पिछड़े


20 कुल होंगे झामुमो के 2 अतिरिक्त विधायक मिलाकर**

02 प्रदीप और बंधु के कांग्रेस में अाने से बढ़े**

07 विधायक जुगाड़ने होंगे मैजिक फिगर के लिए**

16 कांग्रेस के जीत कर अाए विधायक**

अल्पसंख्यक उम्मीदवार देने की बात लोस चुनाव के समय कही गई थी

लाेकसभा चुनाव के दाैरान जब महागठबंधन के गठन के लिए सीट शेयरिंग की बात चल रही थी, तब गाेड्डा सीट काे लेकर कांग्रेस अाैर झाविमाे प्रजातांत्रिक के बीच काफी खींच-तान चल रही थी। कांग्रेस के फुरकान अंसारी अाैर झाविमाे की अाेर से प्रदीप यादव गाेड्डा सीट से चुनाव लड़ने के लिए अपने-अपने दावे पेश कर रहे थे। लेकिन गठबंधन में त्याग की बात करते हुए प्रदेश प्रभारी अारपीएन सिंह ने वह सीट झाविमाे के प्रदीप यादव के लिए छाेड़ दी। उस समय अारपीएन सिंह ने घाेषणा की थी कि राज्यसभा के चुनाव में अल्पसंख्यक काे उम्मीदवार बनाया जाएगा। इसी वजह से अल्पसंख्यक के नाम पर विचार किया गया। हालांकि पिछले दिनाें प्रदेश प्रभारी ने यह साफ किया था कि अल्पसंख्यक के नाम पर किसी व्यक्ति विशेष के लिए काेई कमिटमेंट पार्टी ने नहीं किया था।

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने भले ही अपना उम्मीदवार दे दिया है, लेकिन उसकी राह अासान नहीं दिख रही है। हालांकि नामांकन में कांग्रेस को छोड़कर किसी अन्य विधायक का नाम प्रस्तावक में नहीं है। राजनीति में कभी कुछ अस्थायी नहीं हाेता अाैर कभी भी कुछ हाे सकता है। यह सही है। इसके बावजूद अगर सीधी बात हाे, ताे यही कहा जा सकता है कि कांग्रेस काे राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए प्रमुख विपक्षी दल के भीतर सेंधमारी करनी हाेगी, जाे अासान नहीं है। अाजसू के अलावा एक निर्दलीय विधायक ने भाजपा प्रत्याशी का प्रस्तावक बन कर अपनी मंशा साफ कर दी है। एेसे में निर्दलीयाें की अास लगाए कांग्रेस की डगर अाैर भी कठिन हाे गई है। चुनाव के लिए अभी काफी समय है, समय आने पर ही पता चलेगा लेकिन अभी कांग्रेस का लक्ष्य कठिन ही नजर अा रहा है।
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