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- Ranchi News Gajala Has Received A National Award For Making Lasting Friendships With Nature Shades Of Life And Life
गजाला को रंगों से है पक्की दोस्ती, नेचर व लाइफ के शेड्स बनाने के लिए मिल चुका है नेशनल अवार्ड
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कला की बरीकियां बच्चों को सिखाती हैं
गजाला की पेंटिंग्स की अबतक दो एग्जीबिशन लग चुकी है। वहीं उन्हें 2006 में नेशनल अवार्ड से नवाजा जा चुका है। उसके गुरु शहर के वरिष्ठ चित्रकार तारक शंकर दास हैं। उसे दिवंगत मकबूल फिदा हुसैन की पेंटिग्स काफी पसंद है। गजाला को फिजूल चीजों को संवारना भी अच्छा लगता है। उनके कई क्राफ्ट कला के परिचायक बनते हैं।
आर्टिस्ट न होती तो टीचर होती... सोसाइटी ऑफ फाइन आर्ट एंड क्राफ्ट लिटिल हार्ट स्कूल की संडे क्लास है, जहां गजाला बच्चों को कला की बारीकियां सिखाती हैं। 20 साल में करीब 300 बच्चे महारत हासिल कर चुके हैं।
कोलकाता जाकर बंगीय संगीत परिषद से फाइन आर्ट में डिग्री ली... गजाला ने सेंट जेवियर्स कॉलेज से एमकॉम किया। फिर एमबीए भी। कोलकाता में बंगीय संगीत परिषद से फाइन आर्ट में डिग्री ली। फिर रंगों के साथ दोस्ती स्थाई हो गई। 20 साल से प्रकृति और जिंदगी के शेड्स को कैनवास पर उतार रही हैं। 1000 पेंटिग्स उनकी कूची से जीवंत हो उठी है। इसमें 500 से अधिक स्केचेज, 350 ग्लास पेंटिग्स, 250 एक्रेलिक और बाॅल पेन का कमाल 50 अन्य चित्रों में बोलता है।
संडे का दिन कुछ बच्चों लिए फन डे में बदल जाता है। ये बच्चे सोसाइटी ऑफ फाइन आर्ट एंड क्राफ्ट, कडरू के हैं। हर रविवार में इनके साथ होते हैं, रंग-बिरंगे रंग और उतनी ही खूबसूरत सी टीचर 36 साल की आर्टिस्ट गजाला यास्मीन। जब यह जवाहर विद्या मंदिर में बस्ता पीठ पर लादे बचपन में पहुंचती थी, तो करीब-करीब हर कॉपी का लास्ट पेज पेन-पेंसिल से रंगा हुआ मिला करता था। धीरे-धीरे उनका बालपन किशोर हुआ तो स्कूल पेंटिग्स कंपीटिशन में हिस्सा लेने लगीं। इसके बाद अवार्ड की कतार पीठ थपथपाती गई। मेकॉन में अधिकारी अब्बू मोहम्म्द फजलुल रहमान और हाउस वाइफ अम्मी सैयदा माहे नूर को अपनी लाडली गजाला का रंगों से इश्क पसंद तो आता, पर चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर अफसर बने।