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  • गामा पहलवान, Gama The Undefeated Great Indian Wrestler

कोई नहीं हरा पाया था इस पहलवान को, पत्थर के डंबल-हंसली से बनाई थी बॉडी

3 वर्ष पहले
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अमृतसर. भारतीय इतिहास के महान पहलवान रहे गुलाम मोहम्मद बक्श का 22 मई को जन्मदिन है। रिंग में वे 'द ग्रेट गामा' नाम से जाने जाते थे। ऐसे पहलवान, जिन्होंने जीवन में कभी कोई कुश्ती नहीं हारी। कहते हैं ब्रूस ली भी गामा से प्रभावित थे। इन्हीं से इम्प्रेस होकर ब्रूस ली ने बॉडी बनाना सीखा था। गौरतलब है कि दिन में 5,000 बैठक और हजार से ज्यादा दंड लगाना गामा पहलवान की शेड्यूल में शुमार था। इसके अलावा डाइट इतनी थी कि आप अंदाजा नहीं सकते। आइए जानते हैं गामा पहलवान के बारे में... 

 

- गामा पहलवान के जन्म को लेकर विवाद है। कुछ का मानना है कि 1889 में वे मध्य प्रदेश के दतिया (होलीपुरा) में जन्में थे।
- वहीं, कुछ का मानना है कि उनका जन्म 1880 में पंजाब के अमृतसर में हुआ था। उनके बारे में कहा जाता है कि वे 80 किलो वजनी हंसली (पत्थर से बनी चीज, जिसे गले में पहनते थे) के साथ उठक-बैठक लगाते थे।
- इसके अलावा उनका जो डंबल है, वो किसी आम आदमी के उठाने के बस की बात नहीं है। वो भारी भरकम पत्थर के बने डंबल का इस्तेमाल करते थे। (दतिया के म्यूजियम में आज भी इन्हें संभाल कर रखा गया है)

 

ये थी गामा की डाइट
- गामा पहलवान की डाइट में छह देसी चिकन, 10 लीटर दूध, आधा किलो घी और सवा किलो बादाम का टॉनिक शामिल था।
- बताया जाता है कि उनकी खुराक का खर्च तत्कालीन राजा भवानी सिंह द्वारा उठाया जाता था। गामा ने 10 साल की उम्र में ही पहलवानी शुरू कर दी थी।
- जोधपुर में पहलवानी का टूर्नामेंट हुआ, जिसमें देश भर से हजारों पहलवान भाग लेने पहुंचे थे। इसमें गामा पहलवान ने भी हिस्सा लिया था। तब उनकी उम्र महज 10 साल थी।

 

ऐसे बने वर्ल्ड चैम्पियन
- गामा ने अपनी लाइफ में देश के साथ-साथ विदेशों के 50 नामी पहलवानों से कुश्ती लड़ी और सभी जीतीं।
- वैसे तो गामा पहलवान कई देशों में अपनी कुश्ती का झंडा गाड़ चुके थे, लेकिन असल पहचान उन्हें लंदन में मिली। यहां पहुंचते ही उन्होंने वहां के दिग्गजों के सामने चुनौती पेश कर दी।
- गामा ने उस वक्त के दिग्गज जैविस्को और फ्रेंक गॉच को ललकारा। इतना ही नहीं, उन्हें 9 मिनट 30 सेकंड के अंदर ही चित्त भी कर दिया।

 

बाद में पाकिस्तान चले गए थे
भारत-पाकिस्तान बंटवारे के वक्त वे अपने परिवार के साथ लाहौर चले गए थे। मई, 1960 को लाहौर में ही उनकी मौत हुई।

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