पूजा-पाठ

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गणेश जी की आरती, इन खास बातों का रखना चाहिए ध्यान ये है पूरी विधि और सही तरीका

Ganeshji ki Aarti: गणेश जी की आरती में बत्तियों, वाद्य यंत्र, आरती की घूमाने की दिशा संबंधी जरूरी बातों का ध्यान रखें।

Danik Bhaskar

Sep 12, 2018, 05:38 PM IST

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति जी की आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। गणेश जी की पूजा के बाद आरती करने से दाम्पत्य जीवन में सुख और सौभाग्य आता है। वहीं घर में समृद्धि भी बढ़ती है। सुबह और शाम दोनों समय गणेश जी की आरती करनी चाहिए। आरती के समय कई लोग गलतियां कर देते हैं। गणेश जी की आरती में बत्तियों का प्रकार, उनकी संख्या, वाद्य यंत्र और आरती घूमाने की दिशा जैसी जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

आरती करते समय इन बातों का ध्यान रखें -

1 - आरती शुरू करने से पहले 3 बार शंख बजाएं। शंख बजाते समय मुंह उपर की तरफ रखें। शंख को धीमे स्वर में शुरू करते हुए धीरे-धीरे बढ़ाएं।

2 - आरती करते हुए ताली बजाएं। घंटी एक लय में बजाएं और आरती भी सूर और लय का ध्यान रखते हुए गाएं। इसके साथ ही झांझ, मझीरा, तबला, हारमोनियम आदी वाद्य यंत्र बजाएं। आरती गाते समय शुद्ध उच्चरण करें।

3 - आरती के लिए शुद्ध कपास यानी रूई से बनी घी की बत्ती होनी चाहिए। तेल की बत्ती का उपयोग करने से बचना चाहिए। कपूर आरती भी की जाती है। बत्तियाें की संख्या एक, पांच, नौ, ग्यारह या इक्किस हो सकती है। आरती घड़ी के कांटो की दिशा में लयबद्ध तरीके से करनी चाहिए।

आरती-

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी,
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करे सेवा,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

अँधे को आँख देत कोढ़िन को काया,
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया,
‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी,
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।


जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

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