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डाउनलोड करेंअमिताभ भट्टसाली
बीबीसी संवाददाता, कोलकाता
पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में एक ग़ैर आदिवासी लड़के से प्यार करने के कारण एक 20 वर्षीय आदिवासी लड़की के साथ 12 लोगों ने कथित सामूहिक बलात्कार किया है.
पुलिस के अनुसार गांव के बड़े बुजुर्गों की निगरानी में पंचायत के आदेश पर यह बलात्कार हुआ. लड़के पर भी \'\'प्यार करने का अपराध\'\' करने के लिए 25 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया गया.
पुलिस का कहना है कि सभी 12 अभियुक्तों और गांव के प्रधान को गिरफ़्तार कर लिया गया है. पीड़ित लड़की का ज़िले के अस्पताल में इलाज़ चल रहा है.
ज़िला पुलिस प्रमुख सी सुधाकर ने बताया, \'\'राजारामपुर गांव की पीड़ित लड़की का पड़ोस के चौहाटा गांव के एक ग़ैर आदिवासी लड़के से संबंध था. ये दोनों पिछले पांच साल से एक दूसरे से मिला करते थे.\'\'
उन्होंने कहा कि सोमवार को शादी का प्रस्ताव लेकर जब लड़का लड़की के घर गया तो गांव वालों ने उसे देख लिया और पंचायत बुला ली. पंचायत की कार्रवाई के दौरान लड़के और लड़की को हाथ बांध कर बैठाए रखा गया.
जुर्मानाइसके बाद गांव के प्रधान बलाई मांडी ने फ़ैसला सुनाया कि दोनों को 25-25 हज़ार रुपए का जुर्माना देना होगा. लड़के के परिवार ने 25 हज़ार रुपए का जुर्माना भर दिया जबकि लड़की के परिवार ने जुर्माना भरने में असमर्थता जताई.
इसके बाद मांडी, जो लड़की के दूर के रिश्तेदार भी हैं, ने पीड़ित के साथ बलात्कार का आदेश दिया. पुलिस के पास दर्ज शिकायत के मुताबिक मांडी ने कहा था \'\'उसके परिवार ने जुर्माना नहीं दिया है इसलिए जाओ और लड़की के साथ मज़ा करो.\'\'
बलात्कारियों में लड़की के पिता की उम्र और उसके छोटे भाइयों की उम्र के अभियुक्त भी शामिल हैं.
सोमवार रात को घटी इस घटना के बाद लड़की और उसके परिवार वालों ने हिम्मत जुटाकर बुधवार दोपहर को पुलिस में मामला दर्ज करवाया. लड़की को बीती रात अस्पताल में भर्ती करवाया गया.
बीरभूम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी असित बिस्वास ने कहा कि डॉक्टरों का पांच सदस्यीय दल पीड़ित के स्वास्थ्य पर नज़र रख रहा है. फॉरेंसिक टेस्ट के लिए सैम्पल ले लिए गए है.
पहली घटना नहींबीरभूम में ऐसी पंचायत द्वारा प्रताड़ना की यह पहली घटना नहीं है.
इससे पहले साल 2010 में गांव के बुजुर्गों ने इसी तरह एक ग़ैर आदिवासी लड़के से प्यार करने के कारण एक लड़की को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाने का आदेश दिया था. उस पूरी घटना का वीडियो बनाया गया था और एमएमएस के ज़रिए इसे फैलाया गया था. कुछ रिपोर्टरों के पास जब ये वीडियो पहुंचा तो यह मामला मीडिया में आया.
बीरभूम के आदिवासी इलाके में एक स्वयंसेवी संस्था चलाने वाले कुणाल देब ने कहा कि बीरभूम में ऐसी कई घटनाएं होती हैं, लेकिन कुछ एक ही मीडिया में आती है. आदिवासी समाज में कुछ कुरीतियाँ आ गई हैं, हालांकि परंपरागत तौर पर इन्हें खुली सोच वाला माना जाता है.
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