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गायत्री जयंती 23 जून को, क्यों इन्हें कहा जाता है वेदों की माता?

गायत्री मंत्र सभी वेदों का सार है इसलिए मां गायत्री को वेदमाता कहा गया है।

Danik Bhaskar | Jun 20, 2018, 08:29 PM IST

23 जून को गायत्री जयंती है। गायत्री माता के लिए शास्त्रों में लिखा है कि सर्वदेवानां गायत्री सारमुच्यते जिसका मतलब है गायत्री मंत्र सभी वेदों का सार है। इसलिए मां गायत्री को वेदमाता कहा गया है। वेद का अर्थ है - ज्ञान। इस ज्ञान के चार प्रकार हैं। ऋक्, यजु, साम और अथर्व। ज्ञान के ये चारों रूप हर मनुष्य से किसी न किसी तरह जुड़े हैं। इनमें ऋक् - कल्याण, यज्ञ - पौरूष, साम - क्रीड़ा और अथर्व - अर्थ भाव से संबंधित है। बचपन, युवा, गृहस्थ और संन्सासी जीवन में क्रमश: क्रीडा, अर्थ, पौरूष और कल्याण की अवस्था देखी जाती है। गायत्री संहिता के अनुसार, ‘भासते सततं लोके गायत्री त्रिगुणात्मिका॥’यानी गायत्री माता सरस्वती, लक्ष्मी एवं काली का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन तीनों शक्तियों से ही इस परम ज्ञान यानी वेद की उत्पत्ति होने के कारण गायत्री को वेद माता कहा गया है।

मां गायत्री का उल्लेख ऋक्, यजु, साम, काण्व, कपिष्ठल, मैत्रायणी, तैत्तिरीय आदि सभी वैदिक संहिताओं में है। कुछ उपनिषदों में सावित्री और गायत्री दोनों को एक ही बताया गया है। किसी समय ये सविता की पुत्री के रूप में प्रकट हई थीं, इसलिये इनका नाम सावित्री पड़ गया। कहा जाता है कि सविता के मुख से इनका प्रादुर्भाव हुआ था। भगवान सूर्य ने इन्हें ब्रह्माजी को समर्पित कर दिया। तभी से इनको ब्रह्माणी भी कहा जाता है। गायत्री ज्ञान-विज्ञान की मूर्ति हैं। ये ब्राह्मणों की आराध्या देवी हैं। इन्हें परब्रह्मस्वरूपिणी कहा गया है। वेदों, उपनिषदों और पुराणादि में इनकी विस्तृत महिमा का वर्णन मिलता है।

इस प्रकार गायत्री, सावित्री और सरस्वती एक ही ब्रह्मशक्ति के नाम हैं। वेदव्यास जी ने कहा है कि 'जिस प्रकार पुष्पों का सार मधु, दूध का सार घृत और रसों का सार पय है, उसी प्रकार गायत्री मन्त्र समस्त वेदों का सार है। मां गायत्री को ऋग्वेद में ब्रह्मशक्ति, यजुर्वेद में वैष्णवी और सामवेद में रुद्र शक्ति कहा गया है। उपनिषदों में सावित्री और ब्रह्माणी नाम से इनकी वंदना की गई हैं।