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डाउनलोड करेंविदिशा(एमपी)। विदिशा में रहने वाले बुजुर्ग हरि सिंह राजपूत की मृत्यु होने से उनकी नातिन 16 वर्षीय शालू अब बेसहारा हो गई है। शालू को जन्म देते ही जहां उसकी मां दुनिया छोड़कर चली गई थी, वहीं पिता का करीब 8 साल कहीं कुछ पता नहीं है। दो महीने पहले दादी शांति बाई राजपूत की भी मृत्यु हो गई। दादी की मृत्यु के बाद छोटी सी उम्र में शालू का एक मात्र दादा हरिसिंह ही सहारा थे। अब वे भी इस दुनिया में नहीं रहे। शुक्रवार को बेहद गमगीन माहौल में खुद शालू ने अपने दादा की चिता को मुखाग्नि दी। लोगों से लगाई मदद की गुहार...
- शालू अपने बुजुर्ग दादा हरिसिंह के साथ करैया खेड़ा रोड पर गली नंबर 2 में एक किराए के मकान में अपना जीवन यापन कर रही थी।
- एक तरफ जहां शालू के सिर से उसके बाबा हरिसिंह का साया उठ गया है, वहीं गुजर-बसर करने के लिए उसके पास आय का कोई जरिया भी नहीं है।
- कमजोर होने से शालू की पढ़ाई में शेरपुरा स्थित स्कूल का शिक्षकीय स्टॉफ भी आर्थिक सहयोग कर रहा है। शालू कक्षा 10वीं में हैं।
- बाबा की मृत्यु के बाद मौजूदा समय में शालू के परिवार में कोई सदस्य नहीं है जो उसे सहारा दे सके।
- ऐसे में अब इस किशोरी को विदिशा शहर के समाजसेवियों की मदद की दरकार दिखाई दे रही है।
सोशल मीडिया के जरिए लोगों से मांगी मदद
- मृतक हरिसिंह की अंतिम यात्रा को अपने वाहन के जरिए मुक्तिधाम तक पहुंचाने वाले समाजसेवी विकास पचौरी भी शालू की जिंदगी में आए इस दुखद मंजर को देखकर गमजदा हो गए।
- समाजसेवी विकास पचौरी ने इस बेसहारा किशोरी शालू की हर संभव मदद के लिए विदिशा शहर के समाज सेवी विभिन्न संगठनों, जनप्रतिनिधि और आम लोगों से सोशल मीडिया के जरिए अपील भी की है।
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