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नेशनल ट्रेडिशनल गेम्स में जीता गोल्ड ; पिता ने कहा-अब तोड़ ले अपना बाल विवाह, रोशन करेगी गांव का नाम

3 वर्ष पहले
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भीलवाड़ा (कोटा). भीलवाड़ा की राजकुमारी चौधरी बारां में स्पोर्ट टीचर (अनुबंधित) हैं। वे योगा में राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। रॉक क्लाइंबिंग और माउंटेनियरिंग का बेसिक कोर्स करने पर एडवांस के लिए सिलेक्ट हो चुकी हैं। 2019 में कोर्स पूरा करके माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना लक्ष्य है। इतना हुआ तो पिता को बेटी की काबिलियत पर यकीन हो गया और बचपन में हुई शादी तोड़ने की रजामंदी दे दी। राजकुमारी ने मंगलवार को ही तलाक की अर्जी कोर्ट में पेश कर दी ताकि बाल विवाह की मजबूरी से मुक्त होकर अपनी जिंदगी जी सके। राजकुमारी का कहना है कि मैं कभी नहीं चाहती थी कि मेरा बाल विवाह हो। 

 

 

पिता की बीमारी और समाज के दबाव में कर ली थी शादी

 

मेरे अरमान थे कि अपने गांव ही नहीं बल्कि प्रदेश का नाम रोशन करूं। लेकिन 16 साल की उम्र में पिता ने अपनी बीमारी का हवाला दे दिया। पिता गणेश ने कहा कि तुम्हारी तीन बहनों की शादी हो चुकी है। मैं मर गया तो तुम्हारी शादी कैसे होगी। पिता और समाज के दबाव के चलते शादी करने के लिए सहमति दे दी। राजकुमारी ससुराल नहीं गई। जब बालिग हुई तो पता चला कि पति शराब व अन्य नशों का आदी है। दसवीं पास होकर ट्रैक्टर चलाता है।

 

राजकुमारी अपनी पढ़ाई, रॉक क्लाइंबिंग और योग पर ध्यान देने लगी। 25 साल की राजकुमारी बीए, बीपीएड कर चुकी है। वर्ष 2017 में सीनियर नेशनल योगा चैंपियनशिप में राजस्थान कप्तान के रूप में रजत पदक प्राप्त किया। 2018 में नेशनल ट्रेडिशनल गेम्स कप 56 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड जीता है।

 

पति शराबी और बेरोजगार, ससुराल वाले बना रहे हैं दबाव

 

राजकुमारी चौधरी का कहना है कि मेरा लक्ष्य है कि माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना है। माउंटेनियरिंग के लिए वर्ष 2011 में बेसिक कोर्स किया। एडवांस के लिए आवेदन कर चुकी हूं। वर्ष 2019 में सीट मिली है। इसके बाद दिल्ली स्थित एमआईएस में चयन होगा। इसके बाद माउंट एवरेस्ट पर फतह कर सकूंगी। मेरे ससुराल वाले काफी दिनों से परेशान कर रहे थे। इसलिए मंगलवार को (17 अप्रैल) तलाक के लिए आवेदन किया है।

 

समाज के दबाव और दकियानूसी परंपरा के चलते मेरा जीवन खत्म होने की कगार पर आ गया था। ससुराल वाले काफी परेशान करने लगे थे कि तुम आओ, लेकिन कैसे जाती जब पति ही शराबी और बेरोजगार है। इसलिए मेरा मानना है कि बाल विवाह किसी हालत में नहीं होना चाहिए। इसकी वजह से कई बेमेल रिश्ते होते हंै वो जिंदगी पर भारी पड़ते हैं। कुछ को मजबूरी में अपने सपनों को मारना पड़ता है तो कुछ को खुद को। मेरी सलाह है कि जब तक समझदार न हो तब तक शादी न करें।

 

मां ने कराई 3 लाख रूपए लेकर शादी 

भीलवाड़ा के चौइला का खेड़ा दांताजती गांव में मां ने ही बेटी का Rs.3 लाख में सौदा कर दिया। उम्र में 17 साल बड़े चित्तौड़गढ़ जिले के नेवरिया के युवक प्रेम जाट से उसकी शादी करवा दी। तब वह 10 साल की ही थी। मौका पाकर ससुराल से निकली और मां को छोड़ ताऊ के साथ रहने लगी। स्कूल जाने लगी तो ससुराल वाले वहीं पहुंच गए। वहां से उठाकर ले जाने लगे लेकिन प्रधानाध्यापक के प्रयासों से वे सफल नहीं हो पाए। आज वही प्रीति (बदला नाम) सातवीं में पढ़ रही है। अब अपना बाल विवाह शून्य कराने के लिए उसने आखातीज के दो दिन पहले ही बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रार्थना पत्र पेश किया है। प्रीति जिले की पहली लड़की है जिसने अपना बाल विवाह शून्य करने के लिए कोर्ट गई है।