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यहां नहीं रहना, कृपया घर वालों से संपर्क कीजिए, ये हमारी जिंदगी का सवाल है...

3 वर्ष पहले
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भोपाल. हाईकोर्ट जज और जुवेनाइल जस्टिस कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस जे. के. माहेश्वरी के नेहरू नगर स्थित बालिका गृह में दौरे के दौरान यहां रह रहीं बच्चियों की चिंताजनक कहानियां सामने आई हैं। कई लड़कियों की उम्र 18 साल से ज्यादा हो चुकी है, लेकिन वे यहां रह रही हैं। इनमें से कोई अनुरक्षण गृह में नहीं जाना चाहतीं। वे घर लौटना चाहती हैं या आगे की पढ़ाई में मदद की गुहार लगा रही हैं। करीब 40 लड़कियों ने अपने ब्यौरे दिए हैं। 

 

हमारे घर वालों को डर है कि उन्हें झूठे केस में फंसा दिया जाएगा...  

 

तारा : शादी नहीं करना चाहती - मैं देवास जिले की हूं। मेरी उम्र 22 साल है। मैं 12वीं पास हूं। पढ़ना चाहती हूं। किसी हालत में अनुरक्षण गृह (सुधार गृह) जाकर शादी करना नहीं चाहती। मां-बाप ले जाना नहीं चाहते। मुझे इंदौर में किसी निजी संस्था में भेजा जाए।  
 

अंशुल: आयु परीक्षण होना चाहिए - मुझे अपनी उम्र नहीं मालूम। नानी कहती थी कि 18 साल की होने वाली हूं। मिसरोद के पास मेरा घर है। मेरे माता-पिता को नहीं मालूम कि मैं यहां हूं। यहां एक साल से हूं। मेरा आयु परीक्षण होना चाहिए। मेरे पास  ननद का फोन नंबर है। उन्हें सूचना दीजिए। कि वे मिलने आएं।  

 

सुशीला : ग्रेजुएशन करना चाहती हूं - मैं 18 साल की हो चुकी हूं। सितंबर 2009 से यहां हूं। अब मुझे अनुरक्षण गृह भेजा रहा है। मुझे शादी नहीं करनी। आप वहां जरूर आएं, क्योंकि हो सकता है दुबारा मैं यहां न रहूं। बारहवीं के बाद मैं ग्रेजुएशन करके जॉब करना चाहती हूं।  

 

पूजा: मैं यहां नहीं रहना चाहती - मैैं अगस्त 2016 से यहां हूं। 18 साल की हो चुकी हूं। मैं यहां एक दिन रुकना नहीं चाहती। न ही किसी दूसरी संस्था में जाना। मां-बाप लेना नहीं चाहते। देवास जिले में सोनकच्छ में ससुराल जाना है। कृपा करके उनसे संपर्क कीजिए। मेरी जिंदगी का सवाल है। 

 

संजना : मैं आगे पढ़ना चाहती हूं - एक साल से ज्यादा हो गया। मेरी उम्र 19 साल है। मुझे अनुरक्षण गृह भेजा जा रहा है। लेकिन मुझे वहां नहीं जाना। मुझे इंदौर की किसी संस्था में शिफ्ट करा दीजिए। मां-बाप नहीं हैं। बचपन से बहनों के साथ रही। आगे पढ़ाई में मेरी मदद कीजिए।  

 

प्रिया : पति के पास जाना है - विदिशा के पास मेरा गांव है-डंगरवाड़ा। जून में 18 साल की होऊंगी। पति के पास जाना है। वो भी मुझे ले जाना चाहते हैं। डिलेवरी के समय आए थे। उन्हें डर है कि यहां आए तो उन्हें पुलिस में फंसा दिया जाएगा। 

 

नलिनी: बैंक की नौकरी करना चाहती हूं - रायसेन जिले से हूं। 17 साल उम्र है। बारहवीं पास हूं। कॉमर्स की स्टूडेंट हूं। कॉलेज के बाद बैंक की नौकरी करने का सपना है। कुछ बनना चाहती हूं। किसी होस्टल में रहने की व्यवस्था हो जाए।

 

बच्चियाें को पहुंचाएंगे घर -  मध्य प्रदेश बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि नेहरू नगर बालिका गृह का कुछ दिनों पहले निरीक्षण किया था, वहां कई खामियां मिलीं। इनके बारे में जस्टिस माहेश्वरी को अवगत कराया है। बच्चियों के अधिकारों का संरक्षण करना प्राथमिकता है। अगर यहां रह रही कोई बच्ची घर जाना चाहती है, तो उसे घर भिजवाएंगे।

 

नोट : पहचान छिपाने के लिए बालिका गृह की इन युवतियों के नाम बदल दिए गए हैं।

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