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आईआईटी से पढ़कर सीएम बनने वाले पहले शख्स पर्रिकर 63 साल की उम्र में नहीं रहे : इस खतरनाक कैंसर ने पर्रिकर को बनाया था अपना शिकार, इस कैंसर के बाद मरीज सालों नहीं महीनों तक ही जी जाए तो बड़ी बात

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 08:46 PM IST

दिल्ली, मुंबई नहीं अमेरिका में भी करवा चुके थे इलाज, लेकिन इस खतरनाक कैंसर से बच नहीं सके

Goa Chief Minister Manohar Parrikar Passed away
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हेल्थ डेस्क। गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर नहीं रहे। वे आईआईटी से पढ़कर सीएम बनने वाले पहले शख्स थे। वे काफी लंबे समय से बीमार थे। तबीयत खराब होने के बावजूद अक्सर उनकी काम करते हुए फोटोज आती रहीं।। वे पैंक्रियाज कैंसर से जूझ रहे थे। पिछले 10 साल से कैंसर का इलाज कर रहे सीएचएल हॉस्पिटल के सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. तनुज श्रीवास्तव ने बताया कि पैंक्रियाज में एक्सोक्राइन कैंसर जानलेवा होता है। अधिकांश केस में इसका पता एडवांस स्टेज पर पहुंचने के बाद ही होता है क्योंकि इसके होने पर कोई खास संकेत बॉडी में देखने को नहीं मिलते।

इसका एकमात्र इलाज सर्जरी से संभव है लेकिन सर्जरी तभी की जा सकती है, जब सर्जरी करने की कंडीशन हो। सर्जरी न होने पर इस कैंसर के मरीज 6 से 8 माह जी जाएं तो बड़ी बात होती है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी भी कहती है कि इस कैंसर के डायग्नोज होने के 5 साल बाद तक महज 8.2 परसेंट मरीज ही जिंदा रहते हैं। इन सबके बीच हम बता रहे हैं यह कैंसर क्या होता है, क्यों होता है और इसके संकेत क्या होते हैं।

इसका एकमात्र इलाज सर्जरी से संभव है लेकिन सर्जरी तभी की जा सकती है, जब सर्जरी करने की कंडीशन हो। सर्जरी न होने पर इस कैंसर के मरीज 6 से 8 माह जी जाएं तो बड़ी बात होती है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी भी कहती है कि इस कैंसर के डायग्नोज होने के 5 साल बाद तक महज 8.2 परसेंट मरीज ही जिंदा रहते हैं। इन सबके बीच हम बता रहे हैं यह कैंसर क्या होता है, क्यों होता है और इसके संकेत क्या होते हैं।

क्या होता है पैंक्रिएटिक कैंसर
पैंक्रिएटिक कैंसर ऐसी बीमारी है, जिसमें पैंक्रियास (अग्नाश्य) के टिशू में कैंसर की सेल्स बनती हैं। पैंक्रियाज एक ग्रंथि होती है जो पेट के पाचन तंत्र का हिस्सा है। यह पेट के ऊपरी भाग में रीढ़ की हड्डी के सामने होती है। पैंक्रियाज डाइजेस्टिव जूस और हर्मोंस बनाती है, जो ब्लड शुगर को रेग्युलेट करते हैं। एक्सोक्राइन पैंक्रियाज सेल्स डाइजेस्टिव सेल्स बनाती हैं जबकि एंडोक्राइन पैनक्रियाज सेल्स हार्मोंस बनाती हैं। पैंक्रियाज के अधिकार कैंसर एक्सक्राइन सेल्स से ही शुरू होते हैं।

क्या होते हैं पैंक्रिएटिक कैंसर के संकेत
- पीलिया हो जाता है। स्किन पीली और आंखे सफेद हो जाती हैं।
- पेट के ऊपरी हिस्से और बीच में दर्द होना शुरू हो जाता है। पीठ में भी दर्द होता है।
- बहुत तेजी से वजन कम हो जाता है।
- भूख लगना खत्म हो जाती है।
- थकान महसूस होने लगती है।
- ड्रिप्रेशन आता है।

किन चीजों से पैदा हो सकता है ये कैंसर
- स्मोकिंग करना।
- अनुवांशिक बीमारी होना।
- बहुत लंबे समय तक डायबिटीज रहना।
- बहुत ज्यादा मोटापा होना।

इसकी पहचान कैसे की जाती है
- फिजिकल एग्जाम के बाद डॉक्टर सीटी स्कैन, एमआरआई, एंड्रोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड, लेप्रोस्कोपी, ईआरसीपी औ बायोप्सी जैसे टेस्ट से इसकी पहचान की जाती है।

इलाज क्या है
- पैंक्रिएटिक कैंसर के कई इलाज हैं जैसे सर्जरी, कीमोथैरेपी, रेडिएशन थैरेपी आदि।
- कैंसर को खत्म करने के लिए खास ड्रग्स दिए जाते हैं।
- वहीं थैरेपी के जरिए कैंसर सेल्स को खत्म करने की कोशिश की जाती है।
- सर्जरी ट्यूमर को हटाने के लिए की जाती है।

आंकड़े क्या कहते हैं
- अमेरिकन कैंसर सोसायटी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्सक्राइन पैंक्रियाज कैंसर के सामने आने के एक साल बाद महज 23 परसेंट पेशेंट ही जिंदा रह रहे हैं।
- 8.2 परसेंट कैंसर बीमारी सामने आने के बाद 5 साल से जिंदा हैं।

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