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जज साहब की घास चरने पर कठघरे में बकरी

5 वर्ष पहले
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आलोक प्रकाश पुतुल

रायपुर से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

जज साहब बकरी को भारतीय क़ानून का ज्ञान नहीं रहा होगा, उसे माफ़ कर दिया जाए. अगली बार से वह भी भारतीय क़ानून पढ़ जाएगी, फिर ऐसा गुस्ताख़ी नहीं करेगी, छत्तीसगढ़ के कोरिया ज़िले में पुलिस हिरासत में ली गई एक बकरी को छोड़ने की यह अपील सोशल मीडिया में की गई है.

असल में ज़िले के जनकपुर इलाके में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट साहब के लॉन की घास और फूल पत्तियां एक बकरी खा जाती थी.

मजिस्ट्रेट साहब नाराज़ हुए और उन्होंने पुलिस को सूचना दी.

पुलिस ने आनन-फानन में बकरी और उसके मालिक अब्दुल हसन उर्फ़ गणपत को हिरासत में ले लिया.

जनकपुर के थाना प्रभारी आरएस पैंकरा के मुताबिक, \"हमारे पास जो शिकायत दर्ज़ कराई गई है उसमें कहा गया है कि यह बकरी बार-बार बागवानी को चर जाती थी. बकरी को भगाया जाता था लेकिन वह फिर अगले दिन आ जाती थी.\"

हालांकि स्थानीय वकीलों का कहना है कि जिन धाराओं के तहत बकरी और उसके मालिक की गिरफ्तारी हुई है वे ज़मानती हैं.

वकील जितेंद्र शर्मा ने कहा, \"क़ानूनन तो बकरी और उसके मालिक को थाने से ही ज़मानत मिल जानी चाहिए. हमें उम्मीद है कि आज उन्हें थाने से ही ज़मानत मिल जाएगी.\"

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