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डाउनलोड करेंभोपाल. टीबी (ट्यूबरक्यूलोसिस) से पीड़ित बच्चों को इलाज के दौरान संतुलित आहार नहीं मिल पाता है। हालांकि, इसके लिए सरकार द्वारा हर माह 500 रुपए की मदद की जाती है, लेकिन यह नाकाफी होती है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को संतुलित अाहार मिल सके और उनकी बेहतर देखभाल हो सके, इसके लिए मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पहल की है। टीबी उन्मूलन अभियान में अपना सहयोग देने के लिए उन्होंने भोपाल के 5 बच्चों को टीबी ट्रीटमेंट के लिए गोद लिया है। साथ ही, सभी यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों से 20-20 टीबी पीड़ित बच्चों को गोद लेने की अपील की थी। इसके बाद प्रदेश की विभिन्न संस्थाओं ने 1200 बच्चों को गोद लिया है।
राज्यपाल ने स्वयं पांच बच्चे इलाज के लिए गोद लिए
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बीते महीने स्टेट टीबी एसोसिएशन की बैठक में शामिल हुई थी। वह एसोसिएशन की संरक्षक हैं। बैठक में डॉक्टर्स ने राज्यपाल को बताया कि प्रदेश में मिलने वाले कुल टीबी मरीजों से 10% बच्चे होते हैं। इन बच्चों में से 90% को इलाज के दौरान संतुलित आहार और जरूरी प्रोटीन नहीं मिल पाते। इस बैठक के करीब 10 दिन बाद राज्यपाल ने स्वयं पांच बच्चे इलाज के लिए गोद लिए।
राज्यपाल की पहल के बाद 1200 बच्चों को इलाज के लिए लिया गोद
अकेले भोपाल में ही प्रोफेसर, डॉक्टर और दूसरे सामाजिक संगठनों ने 700 टीबी पीड़ित बच्चों को इलाज के लिए गोद लिया है। इसके लिए शर्त यह रखी गई कि पीड़ित बच्चे को हर सप्ताह उसकी खुराक के अनुसार जरूरी फल और संतुलित भोजन की व्यवस्था उस व्यक्ति या संस्था को ही करनी होगी जिसने उसे गोद लिया है।
रुपए के बजाय फल और पोषण आहार दो
नोडल ऑफिसर डॉ. वर्मा ने बताया कि टीबी से पीड़ित बच्चों के परिवारों को पैसे देने के बजाय उसके पोषक आहार और फल की व्यवस्था करना गोद लेने वाले व्यक्ति को ही करना होगी। साथ ही, 10 दिन में एक बार उस बच्चे की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी उस व्यक्ति को ही बनाकर देनी होगी। जब भी संबंधित व्यक्ति पीड़ित बच्चे के घर पहुंचे तो खाली हाथ नहीं कुछ फल और पोषक आहार लेकर ही पहुंचे।
नई व्यवस्था- सरकार मुफ्त देगी दवा
स्वास्थ्य संचालनालय के अफसरों ने बताया कि टीबी के वयस्क मरीजों की तरह बच्चों को भी इसकी दवाएं सरकार निशुल्क देगी। लेकिन, बच्चा दी गई दवा समय से खा रहा है ? यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उसे गोद लेने वाले व्यक्ति और संस्था की होगी। अफसरों ने बताया कि राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत भोपाल के जेपी, हमीदिया, टीबी अस्पताल और जिला टीबी सेंटर में बीमारी की जांच के लिए टीबी नेट तकनीक की 4 मशीनें लगाई गई हैं। ताकि मरीज की बीमारी की पहचान अर्ली स्टेज पर की जा सके।
बीमारी पर नियंत्रण के लिए पर्याप्त पोषण वाला खाना जरूरी
जिला टीबी नियंत्रण अधिकारी डॉ. मनोज वर्मा ने बताया कि इस बीमारी में मरीज के फेंफड़े कमजोर हो जाते हैं। वह ठीक से सांस नहीं ले पाता। बच्चों में यह बीमारी मिलने पर स्थिति और भी ज्यादा गंभीर हो जाती है। उन्हाेंने बताया कि टीबी के इलाज के दौरान गर्म दवाएं खाने से बच्चों की सेहत बिगड़ जाती है। घर की आर्थिंक स्थिति ठीक न होने से इलाज के दौरान पीड़ित बच्चों को पर्याप्त पोषक तत्वों वाला खाना नहीं मिल पाता। इस कारण बीमारी ठीक नहीं हो पाती। बच्चों को इस बीमारी से निजात दिलाने और दवाओं के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सामाजिक संस्थाओं, यूनिवर्सिटी, कुलपति, डॉक्टर्स, प्रोफेसर्स से टीबी पीड़ित बच्चों को गोद लेने की अपील की थी।
यह भी खास...
- 6000 मरीज हर साल टीबी के भोपाल में होते हैं रजिस्टर्ड।
- 04 अस्पतालों में है टीबी नेट तकनीक से जांच की सुविधा।
- 200 बिस्तरों का टीबी अस्पताल है भोपाल के ईदगाह हिल्स पर।
- 2000 मरीज टीबी के इस साल अब तक हुए हैं रजिस्टर्ड।
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