Hindi News »Business» Govt Likely To Penalise Insurance Companies For Delaying Payment Under NHPS

आयुष्मान भारत योजना के तहत दावों के भुगतान में देरी हुई तो बीमा कंपनियों को 1% ब्याज देना होगा

योजना के तहत चयनित परिवारों को सालाना 5 लाख रुपए तक फ्री इलाज की सुविधा मिलेगी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 16, 2018, 03:44 PM IST

आयुष्मान भारत योजना के तहत दावों के भुगतान में देरी हुई तो बीमा कंपनियों को 1% ब्याज देना होगा
  • आयुष्मान भारत योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को फायदा मिलेगा
  • 20 प्रदेश योजना लागू करने को राजी, केंद्र सरकार की 4 राज्यों से बातचीत जारी

नई दिल्ली. सरकार ने आयुष्मान भारत योजना लागू होने के बाद उसके तहत किए गए दावों (क्लेम) का अस्पतालों को वक्त पर भुगतान नहीं करने वाली बीमा कंपनियों पर जुर्माना लगाने का प्रस्ताव दिया है। अगर कोई बीमा कंपनी भुगतान में 15 दिन से ज्यादा की देरी करती है तो उसे दावा राशि पर तब तक हर हफ्ते एक फीसदी ब्याज देना होगा जब तक पूरी राशि चुका नहीं दी जाती। इस नियम की जानकारी शनिवार को सार्वजनिक हुई। आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) योजना 15 अगस्त से लागू की जा सकती है।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, बीमा कंपनियों को ब्याज की राशि सीधे अस्पतालों को देनी होगी। इस योजना के लाभार्थियों को एक दस्तावेज मिलेगा। इसमें कवर की जाने वाली बीमारियों और उस पर भुगतान राशि की सीमा की जानकारी होगी। इसके अलावा कुछ बीमारियों के इलाज के खर्च के लिए पहले से अप्रूवल लेना होगा। प्रधानमंत्री 15 अगस्त को देशभर में योजना लागू करने की घोषणा कर सकते हैं। 20 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ एमओयू कर चुके हैं। दिल्ली, ओडिशा, पंजाब और पश्चिम बंगाल ने रुख साफ नहीं किया है। केंद्र सरकार की इन चारों राज्यों से बातचीत चल रही है। राज्य सरकारें बीमा कंपनियों, ट्रस्ट या सोसाइटी के जरिए इस योजना को लागू कर सकेंगी।

सालाना 5 लाख रुपए तक फ्री इलाज की सुविधा मिलेगी

केंद्र सरकार ने बजट में आयुष्मान भारत योजना का ऐलान किया था। कहा था कि इसके तहत देश के 10 करोड़ लोगों का फायदा मिलेगा। हालांकि, उस वक्त नाम तय नहीं किया था। योजना के लाभार्थी परिवार 5 लाख रुपए तक सालाना फ्री इलाज करवा सकेंगे। सरकार ने 10 करोड़ परिवारों को इसके तहत कवर करने का लक्ष्य रखा है। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के 8.03 करोड़ और शहरी इलाकों के 2.33 करोड़ परिवार शामिल होंगे। गरीब परिवारों के चयन का आधार सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 को बनाया गया है। शुरुआती दो साल के लिए 10 हजार कराेड़ रुपए का बजट रखा गया है।

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